यूट्यूब के CEO नील मोहन अपने बच्चों को यूट्यूब और सोशल मीडिया से दूर रखते हैं। उनका मानना है कि बच्चों के लिए अनलिमिटेड स्क्रीन टाइम खतरनाक है। इसलिए, उन्होंने घर पर बच्चों के मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम बनाए हैं।

आजकल कई माता-पिता के लिए बच्चों के हाथ से मोबाइल फोन वापस लेना किसी जंग जीतने जैसा है। बच्चे घंटों तक यूट्यूब वीडियो देखने में समय बिताते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस पॉपुलर प्लेटफॉर्म यूट्यूब को पूरी दुनिया देखती है, उसे बनाने वाले लोग अपने ही बच्चों को इसे खुलकर देखने नहीं देते?

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यूट्यूब के हेड नील मोहन ने बताया घर का सीक्रेट

दुनिया भर के बच्चों को घंटों तक बांधे रखने वाले यूट्यूब के हेड नील मोहन, अपने बच्चों को यूट्यूब समेत दूसरे सोशल मीडिया स्क्रीन्स से दूर रखते हैं। टाइम मैगजीन के "सीईओ ऑफ द ईयर" चुने गए नील मोहन ने खुलासा किया कि वह अपने घर पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करने को लेकर सख्त नियम अपनाते हैं। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पत्नी हेमा मोहन अपने तीन बच्चों के मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को कंट्रोल करते हैं।

खतरनाक हो सकती है अनलिमिटेड आजादी

यूट्यूब के सीईओ नील मोहन का मानना है कि बच्चों के लिए अनलिमिटेड आजादी खतरनाक हो सकती है। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने घर के "नो-स्क्रीन" फॉर्मूले के बारे में खुलकर बात की। नील मोहन ने टाइम मैगजीन को दिए इंटरव्यू में अपनी निजी जिंदगी और पेरेंटिंग के बारे में बताया। वह अपने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर करीब से नजर रखते हैं। 2023 में सीईओ बने और हाल ही में टाइम मैगजीन के 2025 के सीईओ चुने गए मोहन ने बताया कि उन्होंने अपने घर पर स्क्रीन टाइम को लेकर रोजाना के नियम लागू किए हैं।

वह और उनकी पत्नी इस बात की साफ सीमा तय करते हैं कि उनके बच्चे यूट्यूब और दूसरे प्लेटफॉर्म पर कितना समय बिताएंगे। उनके और उनकी पत्नी हेमा मोहन के तीन बच्चे हैं - दो बेटे और एक बेटी। हफ्ते के दिनों में घर के नियम ज्यादा सख्त होते हैं। कामकाजी दिनों में बच्चों को स्क्रीन टाइम देने को लेकर घर में कड़े नियम हैं। वहीं, वीकेंड पर थोड़ी ज्यादा आजादी दी जाती है। नील मोहन यह भी मानते हैं कि पेरेंटिंग में परफेक्शन मुमकिन नहीं है, लेकिन संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा, "हम सबसे अच्छी चीज यह कर सकते हैं कि माता-पिता के लिए अपने परिवार के हिसाब से बच्चों के लिए प्लेटफॉर्म को मैनेज करना आसान बनाएं।" उन्होंने बताया कि यूट्यूब पहला ऐसा प्लेटफॉर्म था जिसने बच्चों के लिए एक अलग ऐप शुरू किया, और 10 साल पहले यूट्यूब किड्स ऐप लॉन्च किया था। वैसे, यूट्यूब चीफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।