Bhopal Gas Scandal  

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    NationalDec 3, 2020, 8:10 AM IST

    भोपाल गैस कांड के 102 सर्वाइवर की कोरोना से मौत, अब हो रही अतिरिक्त मुआवजे की मांग

    कोरोना महामारी की वजह से भोपाल गैस कांड के 102 सर्वाइवर ने दम तोड़ दिया। यह आंकड़ा मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से दिया गया है। हालांकि न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट में कहा है कि कुछ एनजीओ ने दावा किया कि भोपाल गैस कांड के 254 सर्वाइवर ने संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया है। भोपाल गैस त्रासदी की 36 वीं बरसी की पूर्व संध्या पर बुधवार 2 दिसंबर को अलग-अलग मौत के आंकड़े सामने आए थे। 

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    Madhya PradeshDec 2, 2020, 1:33 PM IST

    भोपाल त्रासदी के 36 साल: मौत का मंजर दिखाती 1984 की वो खौफनाक रात

    भोपाल, मध्य प्रदेश. शायद सदियों तक भोपाल गैस कांड का असर रहेगा! दुनिया के इतिहास में सबसे भीषणतम त्रासदी कहे जाने वाले भोपाल गैस कांड का असर आज भी उन परिवारों की पीढ़ी में देखा जा सकता है, जो गैस से बुरी तरह प्रभावित हुए थे। 3 दिसंबर को इस त्रासदी के 36 साल पूरे हो जाएंगे। बता दें कि 2-3 दिसंबर, 1984 की दरमियानी रात जेपी नगर के सामने स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड(यूका) के कारखाने में एक टैंक से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट(MIC) लीक हुई थी। जैसे ही यह हवा में घुली...भोपाल में मीलों तक इसका असर हुआ। लोगों को सांस लेने में तकलीफ हुई। आंखों में जलन हुई। देखते ही देखते पूरे शहर में भगदड़ मच गई। जो भाग सका...वो बच गया। जो नहीं भाग सके, वे मर गए। कुछ इतनी बुरी तरह प्रभावित हुए कि जब तक जिंदगी रही, तकलीफ झेलते रहे। आइए देखते हैं गैस कांड की कुछ पुरानी और कुछ नई पीढ़ी की तस्वीरें...

  • <p>Visakhapatnam Gas Leak, Andhra Pradesh Gas Leak, Styrene Gas Leak, LG Polymer Plant, Bhopal Gas Scandal&nbsp;तमिलनाडु के कडलूर जिले में नेवली लिग्वाइन कारपोरेशन के प्लांट में धमाका हो गया, जिसमें 7 लोग घायल हो गए। अभी यह नहीं पता चल सका है कि धमाके के पीछे की वजह क्या है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी पूरा ध्यान लोगों को घटमा स्थल से निकालने में दिया जा रहा है। जहां तक जांच का सवाल है तो प्लांट तो खुद अपने स्तर पर जांच करेगी, लेकिन पुलिस भी मामले की जांच करेगी। गुरुवार को एक के बाद एक तीन प्लान्ट में हादसे की खबर आई। &nbsp;&nbsp;</p>

    NationalMay 7, 2020, 7:57 PM IST

    एक दिन में तीन प्रदेशों में प्लान्ट से जहरीली गैस लीक, लोग कहीं हुए बेहोश तो कहीं बिछ गईं लाशें

    तमिलनाडु के कडलूर जिले में नेवली लिग्वाइन कारपोरेशन के प्लांट में धमाका हो गया, जिसमें 7 लोग घायल हो गए। अभी यह नहीं पता चल सका है कि धमाके के पीछे की वजह क्या है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी पूरा ध्यान लोगों को घटमा स्थल से निकालने में दिया जा रहा है। 

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Visakhapatnam Gas Leak</p>

    NationalMay 7, 2020, 6:03 PM IST

    इंसान हो या जानवर, जो जहां था वहीं पड़े-पड़े बेहोश या फिर मौत हुई...चश्मदीद ने बताया हादसे की कहानी

    नई दिल्ली. विशाखापट्टनम के आरआर वेंकटपुरम गांव में एलजी पॉलिमर इंडस्ट्री से सुबह 3 बजे जहरीली गैस के रिसाव से 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। गैस का ऐसा प्रभाव दिखा कि लोग सड़कों पर ही बेहोश होने लगे। इंसान क्या जानवर भी जहां बैठे या लेटे थे, वहीं पर पहले बेसुध हुए और फिर मौत हो गई। चश्मदीद ने बताया कि करीब 4 बजे से ही अफरा-तफरी मच गई थी। प्लान्ट के 3 किमी. के रेडियस में जहरीली गैस का प्रभाव देखा गया। 
     

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Visakhapatnam Gas Leak, Andhra Pradesh Gas Leak, Styrene Gas Leak, LG Polymer Plant, Bhopal Gas Scandal<br />
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    NationalMay 7, 2020, 12:36 PM IST

    हवा के संपर्क में आते ही जहरीली हो जाती है स्टीरीन गैस, दिमाग और रीढ़ पर बुरा असर, 10 मिनट में मौत

    हैदराबाद. आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक प्लांट (एलजी पॉलिमर) से स्टीरीन  गैस लीक होने से 8 लोगों की मौत हो गई। 5 हजार से ज्यादा लोग इससे बीमार हैं। बीमार का मतलब कुछ लोग उल्टियां कर रहे हैं, कुछ बेहोश हैं, कुछ सांस नहीं ले पा रहे हैं। किंग जॉर्ज अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि प्लांट से रिसने वाली गैस का नाम स्टीरीन है, जो गैस के संपर्क में आने वालों के दिमाग और रीढ़ पर बुरा असर करती है।

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    NationalApr 15, 2020, 4:20 PM IST

    भोपाल गैस कांड के पीड़ितों को शिकार बना रहा कोरोना, NGO का दावा, इन्हें 5 गुना ज्यादा खतरा

    भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जिन 5 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई है, वे लोग 1984 में हुए गैस त्रासदी के शिकार भी थे।बुधवार को अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी। 21 मार्च को भोपाल गैस त्रासदी के लिए काम करने वाले कुछ संगठनों ने अधिकारियों को लिखित में दिया भी था कि गैस त्रासदी से प्रभावित लोगों को कोरोना से पांच गुना ज्यादा खतरा है।