Emotional Story  

(Search results - 314)
  • Punjab7, Aug 2020, 3:13 PM

    जन्म के बाद ही मां-बाप तलाक लेकर बेटी को रिश्तेदार की गोद में छोड़ गए..अब 'यशोदा मैया' से बिछुड़ गई ये बच्ची

    पटियाला, पंजाब. अपनी 'यशोदा मैया' से चिपटकर फूट-फूटकर रो रही इस 9 साल की बच्ची की पीड़ा शायद ही कोई समझ सके! मामला जलालपुर गांव से जुड़ा है। यह बच्ची जब पैदा हुई, तब मां-बाप के बीच तलाक हो गया। बच्ची को पालने-पोसने की जिम्मेदारी उसकी एक रिश्तेदार को सौंप दी गई। यशोदा मैया ने बच्ची को अपनी बेटी समझकर खूब लाड़-प्यार किया। अब पिता कानूनी लड़ाई लड़की बेटी की कस्टडी हासिल कर चुका है। पिता जब बेटी को अपने साथ ले जाने के लिए पहुंचा, तो बच्ची रो पड़ी। वो अपनी यशोदा मैया का दामन छोड़ने को राजी नहीं हुई। दोनों घंटों एक-दूसरे से लिपटकर रोते रहे। बड़ी मुश्किल से बेटी को पिता ले जा सका। देखें कुछ इमोशनल तस्वीरें...

  • Jharkhand6, Aug 2020, 7:27 PM

    पुलिस में जाना चाहती है बेटी, पिता ने पढ़ने से मना किया तो छोड़ा घर..रोते हुए बयां किया अपना दर्द

    यह कहानी गुमला जिले के बाल कल्याण समिति में गरुवार को सामने आई। जहां एक बेटी ने अपने पिता का घर इसिलए छोड़ दिया क्योंकि पिता उसको आगे पढ़ाना नहीं चाहता है। बच्ची ने रोते हुए पुलिस के सामने आपना दर्द बयां किया।

  • Madhya Pradesh2, Aug 2020, 2:03 PM

    नहीं देखा होगा ऐसा रामभक्त: मंदिर के लिए दादी ने 28 साल से नहीं खाया अन्न, अब दिल में एक ही तमन्ना

    जबलपुर (मध्य प्रदेश). अयोध्या में राम मंदिर की भूमि पूजन को लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। 5 अगस्त को देश के लाखों लोगों का वह सपना पूरा होने वाला है, जिसके लिए वो वर्षों से संघर्ष कर रहे थे। जैसे ही पीएम नरेंद्र मोदी मंदिर की नींव रखेंगे वैसे ही जबलपुर की रहने वाली 81 साल की बुजुर्ग महिला उर्मिला चतुर्वेदी की सालों की तपस्या भी पूरी हो जाएगी। उन्होंने 28 साल पहले विवादित ढांचा गिरने पर संकल्प लिया था कि जब तक भगवान राम का मंदिर बनना शुरू नहीं होगा वो तब तक अन्न ग्रहण नहीं करेंगी। 

  • Rajasthan1, Aug 2020, 11:26 AM

    मां जैसा कोई नहीं: 75 साल की उम्र में मजदूरी कर बीमार बेटे को पाल रही, पहले पति फिर बड़े बेटे की मौत

    दुनिया में अगर सच्चा प्यार कोई करता है तो वह सिर्फ मां होती है, जो अपने बच्चे से बिना स्वार्थ के प्यार करती है। कुछ ऐसी ही कहानी आज राजस्थान से देखने को मिली है, जिसको पढ़कर आपकी आंखे नम हो जाएंगी। जहां एक बूढ़ी मां अपने बेटे को लिए दिन रात मजदूरी करके उसका पेट पाल रही है।

  • Other States31, Jul 2020, 7:38 PM

    रक्षा बंधन से पहले 3 भाई-बहनों की दर्दनाक मौत, चीखते हुए कह रहे माता-पिता अब इन राखी क्या करेंगे

    ऋषिकेश (उत्तराखंड़), दो दिन बाद देश में रक्षबंधन का त्यौहार मनाया जाएगा। इस दिन का सभी भाई-बहन बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। लेकिन देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड के एक परिवार के लिए यह दिन मातम मनाते हुए बीतेगा। क्योंकि रक्षा बंधन से 2 दिन पहले तीन भाई बहनों की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई। 
     

  • Other States29, Jul 2020, 9:26 AM

    बेटे को डॉक्टर बनाने सबकुछ बेचकर उसे चीन भेजा..लेकिन उसी देश की फैलाई बीमारी ने दुनिया उजाड़ दी

    एक पिता ने अपने बेटे को इसलिए डॉक्टर बनाया था, ताकि वो लोगों की सेवा कर सके। बेटे को MBBS कराने पिता ने जिंदगीभर जो कुछ कमाया-जोड़ा..सब उसकी पढ़ाई-लिखाई पर खर्च कर दिया। अब वो बेटे के लिए लड़की ढूंढ रहा था, लेकिन इससे पहले ही जिंदगी में कोरोना ने दस्तक दे दी और सबकुछ बिखर गया। यह कहानी 27 साल के डॉ. जोगिंदर की है। वे नई दिल्ली के डॉक्टर बाबा साहेब अंबेडकर हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे थे। 23 जून को उन्हें बुखार आया। मालूम चला कोरोना है। फिर 27 जुलाई को उनकी मौत हो गई। पिता को बेटे की मौत को गहरा सदमा बैठा है।

  • Chhattisgarh26, Jul 2020, 9:14 PM

    7 साल की बेटी ने चाचा की गोद में आकर पिता की चिता को दी मुखाग्नि, जिसने देखा यह दुखद पल वह रो पड़ा

     पत्नी को जैसे ही पति की मौत के बारे में पता चला तो चीखते हुए बेसुध हो गई।  लेकिन पिता की मौत से बेखबर मासूम बच्चियों को यह नहीं पता था कि उनकी मां क्यों रो रही है। परिवार के लोगों ने 7 साल की बड़ी बेटी युक्ति को गोद लेकर पिता को मुखाग्नि दिलवाई।

  • Jharkhand23, Jul 2020, 3:57 PM

    बड़ी दुखद है इस खिलाड़ी की कहानी, पूरा घर गोल्ड मेडल से भरा..फिर भी पेट भरने को करनी पड़ रही मजदूरी

    जमशेदपुर (झारखंड). कोरोना की वजह से लागू किए लॉकडाउन का असर समाज के हर वर्ग पर पड़ा है। इस दौरान देश से कई मार्मिक की कहानियां सामने आई हैं। ऐसी ही एक बेबसी की कहानी एक झाखंड से आई है, जहां जहां देश के लिए सैंकड़ों गोल्ड मेडल जीतने वाला खिलाड़ी आज दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज है। आलम यह है कि उसको अपने पेट भरने क लिए 300 रुपए रोज दिहाड़ी करना पड़ रही है।
     

  • <p>कहते हैं सफलता किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती है। इंसान के दिल में कुछ कर-गुजरने का जज्बा हो तो वह कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है यूपी पुलिस में तैनात एक कांस्टेबल के बेटे ने। पिता ने भले ही खुद कष्ट में जिंदगी बिताई हो लेकिन कभी अपने बेटे की पढ़ाई में आर्थिक अभाव आड़े नहीं आने दिया। पिता के इसी  त्याग को बेटे ने अपना हौसला बनाया और एक दिन वो हासिल करके दिखा दिया जिसका उसके मां- बाप ने सपना देखा था। आज हम आपको बताने का रहे हैं मूल रूप से बलिया के रहने वाले DSP अमित सिंह की। अमित 2019 बैच के PPS अफसर हैं।</p>

    Careers23, Jul 2020, 12:25 PM

    लाल को काबिल बनाने किराए के 2 कमरों में बिता दी जिंदगी; जज्बा देखिए बेटा DSP बन गया

    कहते हैं सफलता किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती है। इंसान के दिल में कुछ कर-गुजरने का जज्बा हो तो वह कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है यूपी पुलिस में तैनात एक कांस्टेबल के बेटे ने। पिता ने भले ही खुद कष्ट में जिंदगी बिताई हो लेकिन कभी अपने बेटे की पढ़ाई में आर्थिक अभाव आड़े नहीं आने दिया। पिता के इसी  त्याग को बेटे ने अपना हौसला बनाया और एक दिन वो हासिल करके दिखा दिया जिसका उसके मां- बाप ने सपना देखा था। आज हम आपको बताने का रहे हैं मूल रूप से बलिया के रहने वाले DSP अमित सिंह की। अमित 2019 बैच के PPS अफसर हैं।

  • Haryana22, Jul 2020, 11:10 AM

    चाय बेचने वाले पर निकला बैंक का 51 करोड़ का लोन, सच्चाई जान उड़े लोगों के होश..फूट-फूटकर रो रहा गरीब

    कुरुक्षेत्र. हरियाणा में बैंक के कारनामे की बदौलत एक बेचारे रेहड़ी पर चाय बेचने वाले पर मुसीबतों का पहाड़ टूटा है। एक ही झटके में गरीब को  51 करोड़ रुपए का डिफाल्टर बना दिया है। बैंक के अनुसार उसने 51 करोड़ रुपए का लोन लिया है, लेकिन युवक को इस बारे में पता तक नहीं। क्योंकि उसने कभी कोई कर्ज लिया ही नहीं था।

  • Other States21, Jul 2020, 12:07 PM

    इस क्राइम रिपोर्टर ने देखा कुछ ऐसा शॉकिंग कि छोड़ दी अपनी जॉब, अब कर रहीं इस फील्ड में काम

    अहमदबाद, गुजरात. लॉकडाउन ने लोगों की जिंदगी पर बुरा असर डाला है। काम-धंधा बंद होने से लोगों के भूखों मरने की नौबत आ गई है। लेकिन इस संकट के बीच लोग अब रोजी-रोटी के नये अवसर भी तलाश रहे हैं। गुजरात का एक NGO रेड लाइट एरिया की यौनकर्मियों के लिए रोजगार के नये मौके लेकर सामने आया है। NGO की मदद से इन महिलाओं को मास्क बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। NGO की प्रमुख सोनल रोचानी कहती हैं कि इससे दो फायदे हैं। पहला-महिलाओं को रोजगार मिलेगा और दूसरा-उन्हें नारकीय जिंदगी से बाहर निकलने का मौका भी मिलेगा। आपको बता दें कि सोनल पहले एक क्राइम रिपोर्टर थीं। रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा देखा कि जॉब छोड़कर महिलाओं के लिए काम करने की ठानी। जानिए सोनल की कहानी....

  • Maharashtra18, Jul 2020, 6:57 PM

    कोरोना ने छीना माता-पिता का साया, बेटा बोला-जो फूल उनके वेलकम के लिए रखे थे, वह चिता पर चढ़ाने पड़े

    औरंगाबाद. महाराष्ट्र में कोरोना के कहर के चलते ऐसा लगने लगा है कि मानों जिंदगी थम सी गई है। महामारी के बढ़ते प्रकोप के शिकार अब आम जनता के साथ-साथ बॉलवुड एक्टर और नेता भी होने लगे हैं। वहां मरीजों और इससे मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ता जा रहा है। औरंगाबाद से ऐसी ही एक दुख कहानी सामने आई है, जहां इस कोरोना ने एक बेटे के सिर से माता-पिता साया छीन लिया। 

  • Punjab13, Jul 2020, 6:15 PM

    पाकिस्तानी शख्स के प्यार में डूबी महिला, 3 बच्चों को छोड़कर ऐसी भागी कि आज तक नहीं लौटी

    होशियारपुर, पंजाब. इश्क जो न कराए..सो कम! इस महिला ने अपने प्यार के लिए अपनी कोख से जन्मे तीन बच्चों की फिक्र तक नहीं की। 2018 में यह महिला बैसाखी पर पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित पंजा साहिब और गुरुद्वारा ननकाना साहिब की यात्रा निकली थी। वो 1800 लोगों के जत्थे में शामिल थी। लेकिन पूरा जत्था लौट आया, लेकिन वो नहीं लौटी। अब यहां उसके ससुर को तीनों बच्चों को पालना मुश्किल हो रहा है। कोरोना में काम-धंधा नहीं होने से परिवार के भूखे मरने की नौबत आ गई है। इस महिला का नाम है किरणबाला। इसने पाकिस्तान में जाकर अपना धर्म बदल लिया था। अब इसे आमना बीवी के नाम से जाना जाता है। वहां उसने लाहौर के रहने वाले मोहम्मद अजीज से निकाह कर लिया था। यहां होशियारपुर के गढ़शंकर शहर में उसके बच्चे रहते हैं। पढ़िए अजब प्रेम कहानी...

  • Other States2, Jul 2020, 11:35 AM

    नाना के जनाजे पर खिलखिलाकर हंस रहा था मासूम..आतंकवाद से बेखबर बच्चे को लग रहा था कि नानू सो रहे हैं

    सोपोर, जम्मू-कश्मीर.  जम्मू-कश्मीर के सोपोर में बुधवार को आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ में  एक आम नागरिक बशीर अहमद को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। वे ठेकेदार थे। बशीर अपने काम के सिलसिले में कार से निकले थे। साथ में उनका नाती अयाद भी था। इसी बीच माडल टाउन में आतंकवादियों ने CRPF के जवानों की नाका पार्टी पर हमला कर दिया था। बशीर सड़क पर ही कार छोड़कर अयाद को लेकर सुरक्षित जगह पर भागे। लेकिन आतंकवादियों की गोलियां उनके शरीर को भेद गईं। बशीर की सड़क पर ही मौत हो गई। अपने नाना की मौत से बेखबर मासूम अयाद उनकी छाती पर बैठकर उठाता रहा। करीब 15 मिनट की मशक्कत के बाद जवानों ने उसे सुरक्षित बचाया। आगे देखिए जब बशीर का जनाजा उठा..तब कैसा माहौल था..

  • Rajasthan2, Jul 2020, 10:22 AM

    मजदूरी करने गई थी बूढ़ी मां, तभी बेटे की शहादत की मिली खबर..आखिरी कॉल में कहा था-'मैं गांव आ रहा हूं'

    सीकर, राजस्थान. देश की रक्षा-सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वाले जाबांजों की जिंदगी आम आदमी से भी कठिन होती है। बेशक किसी को यह मालूम नहीं रहता कि अगले पल क्या होने वाला है, लेकिन एक फौजी के लिए यह आशंका सबसे ज्यादा रहती है। जम्मू-कश्मीर के सोपोर में बुधवार को आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए सीकर के 39 वर्षीय जाबांज दीपचंद 11 जुलाई से छुट्टी पर गांव में रहने वाली अपनी बूढ़ी मां से मिलने आ रहे थे। इनके पिता का तीन साल पहले बीमार के चलते निधन हो गया था। तब से मां अकेली थी। मां किसी पर बोझ नहीं बनी। वो आज भी मजदूरी करती है। दीपचंद्र  सीआरपीएफ की 179 बटालियन में हेड कांस्टेबल थे। उनका 6 महीने पहले ही उनका प्रमोशन हुआ था। बता दें इस आतंकी हमले में एक आम नागरिक की भी मौत हो गई थी। फोटो में दिखाई दे रहे शख्स को गोलियां लगी थीं। आगे पढ़िए शहीद की कहानी...