Pandava  

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    Aisa KyunMay 19, 2021, 10:40 AM IST

    जब अभिमन्यु ने चक्रव्यूह तोड़ा तो भीम, युधिष्ठिर आदि योद्धा क्यों उसमें प्रवेश नहीं कर पाए?

    अर्जुन का पुत्र अभिमन्यु महाभारत के पात्रों में से एक है। जब कुरुक्षेत्र में कौरव और पांडवों की सेनाएं आमने-सामने थी, उस समय युधिष्ठिर को बंदी बनाने के लिए गुरु द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना की थी।

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    Aisa KyunMay 9, 2021, 11:35 AM IST

    धर्म ग्रंथों की इन माताओं से सीखें कैसे बनाएं अपने बच्चों को सफल, गुणी और चरित्रवान

    उज्जैन. आज (9 मई) मदर्स डे है। हिंदू धर्म ग्रंथों में माता को भगवान से भी अधिक पूजनीय बताया गया है। हमारे ग्रंथों में कई ऐसी माताओं के बारे में बताया गया है, जिनकी संतान को समाज में एक आदर्श के रूप में देखा जाता है। इनमें से कई माताएं तो ऐसी भी हैं, जिन्होंने अभावों में रहकर भी अपनी संतान को गुणी और चरित्रवान बनाया। इनकी संतान की सफलता का श्रेय उनकी माताओं को ही जाता है। आज हम आपको धर्म ग्रंथों में बताई गई ऐसी ही माताओं के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार है…

    हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। इस बार यह 9 मई को मनाया जा रहा है। मदर्स डे का दिन माताओं के लिए समर्पित होता है। वैसे तो मां की ममता और प्यार किसी दिन की मोहताज नहीं। लेकिन मां के संघर्ष और ममता को सम्मान देने के लिए आज का दिन यानी मदर्स डे बनाया गया है।

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    Aisa KyunMar 26, 2021, 3:28 PM IST

    पांडवों के पूर्वज थे राजा नहुष, देवताओं ने बनाया था स्वर्ग का अधिपति, लेकिन एक श्राप से बन गए थे अजगर

    महाभारत के अनुसार, जिस समय पांडव वनवास में थे, उस समय एक विशाल अजगर ने भीम को जकड़ लिया था। दरअसल वो अजगर और कोई नहीं बल्कि उन्हीं के पूर्वज राजा नहुष थे, जो अगस्त्य ऋषि के श्राप से अजगर बन गए थे।

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    Aisa KyunMar 21, 2021, 3:16 PM IST

    यज्ञ की अग्नि से हुआ था इस पराक्रमी योद्धा का जन्म, श्रीकृष्ण ने बनाया था पांडवों का सेनापति

    महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से कई सेनापति बनाए गए, इनमें भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य और कर्ण प्रमुख थे, लेकिन पांडवों की ओर से सिर्फ एक ही सेनापति युद्ध के अंत तक रहा था। ये थे पांचाल देश के युवराज धृष्टद्युम्न।

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    Aisa KyunFeb 6, 2021, 12:06 PM IST

    महात्मा भीष्म ने अंतिम समय में पांडवों को बताए थे सुखी और संपन्न जीवन के ये सूत्र

    महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार पितामह भीष्म जब बाणों की शय्या पर लेटे थे, तब उनसे मिलने सभी पांडव पहुंचे थे। इस समय धर्मराज युधिष्ठिर ने बाणों की शैया पर लेटे हुए भीष्म पितामह से धर्म के विषय में कईं सवाल पूछे। तब भीष्म पितामाह ने पांडवों को दानधर्म, राजधर्म, मोक्षधर्म, स्त्रीधर्म और अन्य जीवन के रहस्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की।

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    Aisa KyunJan 6, 2021, 11:55 AM IST

    महाभारत: कौन आंखे खोलकर सोता है, जन्म लेने पर कौन हिलता-डुलता नहीं है? यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछे थे ये सवाल

    कौरवों से जुएं में हारने के बाद पांडवों को वनवास में जाना पड़ा। एक दिन पांडव वन में घूमते-घूमते थक गए और उन्हें प्यास लगी। पानी की तलाश में वह 1 तालाब के पास पहुंचे जहां युधिष्ठिर को छोड़कर 1-1 कर के सारे पांडवों की मृत्य हो गई। तब यक्ष के रूप में यमराज ने युधिष्ठिर की परीक्षा ली। 

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    Aisa KyunJan 4, 2021, 12:54 PM IST

    किस अप्सरा ने क्यों दिया था अर्जुन को किन्नर बनने का श्राप? ये है पूरी कथा

    कौरवों से जुएं में हारने के बाद पांडवों को 12 साल तक वनवास और 1 साल तक अज्ञातवास में रहना पड़ा। अज्ञातवास के दौरान सभी पांडवों ने अपना नाम और पहचान छिपाई थी। इस दौरान अर्जुन राजा विराट के महल में बृहन्नला यानी किन्नर रूप में रहे।

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    Aisa KyunDec 14, 2020, 12:57 PM IST

    महाभारत: ये 9 आदतें किसी को भी बर्बाद कर सकती हैं, इनसे बचकर रहना चाहिए

    उज्जैन. कुरुक्षेत्र में हुए युद्ध के बाद जब भीष्म पितामाह तीरों की शय्या पर थे। उस समय युधिष्ठिर प्रतिदिन उनसे मिलने जाते हैं। एक बार युधिष्ठिर ने भीष्म से पूछा कि मनुष्य को किन बातों या किन आदतों से दूर रहना चाहिए तो भीष्म ने उन्हें 9 आदतों के बारे में बताया, जो इंसान के पतन का कारण बनती हैं। वह कौन सी आदतें है, इसकी जानकारी इस प्रकार है…

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    Aisa KyunDec 12, 2020, 10:28 AM IST

    महाभारत से जानिए एक लीडर में कौन-कौन से गुण होना जरूरी है

    पुरातन समय से लेकर लगभग एक सदी पहले तक हमारे देश में राजाओं का शासन था। जहाँ कुछ राजाओं को हम उनकी नेकी, वीरता, बलिदान, सद्गुणों आदि के कारण याद करते है तो कुछ राजा अपने अवगुणों के कारण जाने जाते है। एक राजा में क्या-क्या गुण होने चाहिए, इसका वर्णन महाभारत के शांति पर्व में विस्तार पूर्वक लिखा है। ये गुण आज के समय में भी प्रासंगिक हैं जो व्यक्ति को एक अच्छा लीडर बनाते हैं ।

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    Aisa KyunDec 8, 2020, 11:01 AM IST

    कुरुक्षेत्र में 18 दिन तक चला था महाभारत का युद्ध, जानिए किस दिन क्या हुआ

    महाभारत का युद्ध लगातार 18 दिनों तक चला था। इस युद्ध में कौरव और पांडवों की ओर से अलग-अलग देशों के राजाओं ने भी हिस्सा लिया था। अरबों लोग इस युद्ध में मारे गए, जो उस समय की बहुत बड़ी आबादी थी। आाज हम आपको बता रहे हैं कि 18 दिनों तक चलने वाले इस युद्ध में किस दिन क्या घटनाक्रम हुआ…

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    Aisa KyunNov 25, 2020, 10:39 AM IST

    महाभारत युद्ध में पांडवों और कौरवों ने कब, किस योद्धा का छल से वध किया?

    कौरवों और पांडवों ने मिलकर महाभारत युद्ध के लिए कुछ नियम बनाए थे जिनका दोनों ही पक्षों को पालन करना था। युद्ध शुरू होने से कुछ दिनों बाद तक तो इन नियमों का पालन किया गया, लेकिन बाद में इन नियमों को कई बार तोड़ा गया और छल का सहारा लेकर योद्धाओं को मारा गया। युद्ध में कब, किसने छल से योद्धाओं का वध किया, आज हम आपको यही बता रहे हैं-

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    Aisa KyunNov 9, 2020, 12:39 PM IST

    वनवास के दौरान यमराज के हाथों मारे गए थे 4 पांडव, युधिष्ठिर ने किया था उन्हें पुनर्जीवित, जानिए कैसे?

    महाभारत युद्ध पांडवों ने जीता था और इस जीत में भीम और अर्जुन की भूमिका महत्वपूर्ण थी। युद्ध से कुछ समय पहले ही भीम और अर्जुन के साथ नकुल, सहदेव भी मर चुके थे। इन चारों भाइयों को पुर्नजीवित करवाया था युधिष्ठिर ने। महाभारत के रोचक प्रसंग में जानिए चारों पांडवों की मृत्यु कैसे होई और युधिष्ठिर ने किस प्रकार उन्हें पुर्नजीवित किया

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    ReligionOct 18, 2020, 12:20 PM IST

    जिस स्थान की पांडवों ने की थी खोज, घर बैठे करें मां ज्वाला देवी के दुर्लभ दर्शन

    वीडियो डेस्क।  माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक ज्वालादेवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा घाटी में स्थित है। यहां माता की जीभ गिरी थी। इसीलिए इसका नाम ज्वालादेवी मंदिर है। हालांकि इस मंदिर की एक और कथा है जो इंद्र की पत्नी शचि से जुड़ी है।इस मंदिर में माता के मूर्तिरूप की नहीं बल्कि ज्वाला रूप की पूजा होती है जो हजारों वर्षों से प्रज्वलित है। कालांतर में इस स्थान को व्यवस्थित किया गुरुगोरख नाथ ने। यहां प्रज्वलित ज्वाला प्राकृतिक न होकर चमत्कारिक मानी जाती है।  सतयुग में महाकाली के परमभक्त राजा भूमिचंद ने स्वप्न से प्रेरित होकर यहां भव्य मंदिर बनाया था। बाद में इस स्थान की खोज पांडवों ने की थी। इसके बाद यहां पर गुरुगोरखनाथ ने घोर तपस्या करके माता से वरदान और आशीर्वाद प्राप्त किया था। सन् 1835 में इस मंदिर का पुन: निर्माण राजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने करवाया था।

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    Aisa KyunOct 12, 2020, 12:32 PM IST

    विदुर नीति: जिस व्यक्ति में होते हैं ये 8 गुण, सभी लोग करते हैं उसकी प्रशंसा

    महाभारत के प्रमुख पात्र महात्मा विदुर भी थे। वे धृतराष्ट्र के भाई भी थे और उनके मंत्री भी। जब कौरव और पांडवों की सेना कुरुक्षेत्र में युद्ध के लिए आ खड़ी हुई तो विदुर ने धृतराष्ट्र को इस युद्ध को रोकने के लिए नीतिपूर्ण बातें बताईं। उसे ही विदुर नीति कहते हैं।

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    Aisa KyunOct 1, 2020, 3:20 PM IST

    महाभारत: कौरवों का मामा शकुनि किस देश का राजा था, युद्ध में किसके हाथों हुआ था उसका वध?

    शकुनि महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक था। शकुनि गांधार साम्राज्य का राजा था। यह स्थान वर्तमान के अफगानिस्तान में है।