सार
5 big Durga temples of India: चैत्र नवरात्रि 30 अप्रैल 2025 से शुरू। माँ दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। भारत के 5 प्रसिद्ध देवी मंदिरों के बारे में जानें जहाँ नवरात्रि में दर्शन करना शुभ माना जाता है।
Chaitra Navratri 2025: हर साल की तरह इस साल भी चैत्र नवरात्रि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू हो रही है। इस साल चैत्र नवरात्रि 30 अप्रैल 2025 से शुरू हो रही है जो 6 अप्रैल 2025 तक चलेगी। खास बात ये है कि इस साल मां दुर्गा अपनी सवारी शेर पर नहीं बल्कि हाथी पर सवार होकर आएंगी। आपको बता दें, हिंदू धर्म में हाथी को समृद्धि, सौभाग्य और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। इस बार अष्टमी और नवमी भी एक साथ पड़ रही है। 9 दिनों के इस पावन पर्व में लोग मां के दर्शन के लिए अलग-अलग मंदिरों में जाना पसंद करते हैं। भारत में मां के कई अलग-अलग मंदिर हैं। जिनकी बड़ी मान्यता है। ऐसे में आज हम आपको इस खबर के जरिए 5 ऐसे बड़े देवी मंदिरों की जानकारी दे रहे हैं, जहां दर्शन के लिए दूर-दूर से लाखों लोग आते हैं। जानिए कौन से हैं वो मंदिर...
माता वैष्णो देवी मंदिर (Mata Vaishno Devi Temple)
जम्मू के कटरा में स्थित माता वैष्णो देवी के दरबार में हमेशा भक्तों की भारी भीड़ रहती है। यह उत्तर भारत के सबसे पूजनीय पवित्र स्थलों में से एक है। यह तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद भारत में दूसरा सबसे अधिक देखा जाने वाला धार्मिक तीर्थ स्थल है। हर साल नवरात्रि के अवसर पर लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। लोगों का मानना है कि यहां हर कोई नहीं आ सकता, केवल वे ही लोग मंदिर की तीर्थ यात्रा पूरी कर सकते हैं जिन्हें देवी वैष्णो बुलाती हैं। मान्यताओं के अनुसार, यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है।
चामुंडा माता मंदिर (Chamunda Mata Temple)
श्री चामुंडा देवी मंदिर चामुंडा नंदिकेश्वर धाम के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर उत्तर भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में हैं। यह श्री चामुंडा देवी को समर्पित है, जो देवी दुर्गा का एक रूप हैं। देवी चामुंडा की मूर्ति को विभिन्न रंगों के वस्त्र पहनाए जाते हैं, लेकिन लाल और काले रंग का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। देवी की मूर्ति को विभिन्न रंगों की मालाओं, कमल सहित फूलों से सजाया जाता है। कभी-कभी खोपड़ियों की माला के बजाय मूर्ति को नींबू की माला से सजाया जाता है। नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में जाना बहुत शुभ माना जाता है।
कामाख्या मंदिर (Kamakhya Temple)
गुवाहाटी से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामाख्या मंदिर देश के सबसे बड़े शक्ति मंदिरों में से एक है। नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर तांत्रिक उपासकों और हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। इसे इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह वह मंदिर है जहां आर्य समुदायों की मान्यताएं और प्रथाएं गैर-आर्य समुदायों से मिलती हैं। भगवान शिव के विभिन्न रूपों को समर्पित कामाख्या मंदिर परिसर में पांच मंदिर हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर में भगवान विष्णु के भी तीन मंदिर हैं, जो केदार, गढ़धर और पांडुनाथ के रूप में मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में जाकर देवी के दर्शन करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
दक्षिणेश्वर काली मंदिर (Dakshineswar Kali Temple)
दक्षिणेश्वर काली मंदिर या दक्षिणेश्वर कालीबाड़ी भारत के पश्चिम बंगाल के कोलकाता के दक्षिणेश्वर में स्थित एक हिंदू नवरत्न मंदिर है। हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित इस मंदिर की मुख्य देवी भवतारिणी हैं, जो महादेवी या पराशक्ति आद्या काली का एक रूप हैं, जिन्हें आदिशक्ति कालिका भी कहा जाता है। पूरे वर्ष दुनिया भर से लाखों भक्त दक्षिणेश्वर आते हैं। मंदिर परिसर में एक मंदिर, प्रांगण नवरत्न मंदिर, द्वादशा शिव मंदिर और विष्णु मंदिर, एक नट मंदिर, एक सुंदर प्रांगण है।
अंबाजी मंदिर (Ambaji Temple)
गुजरात में स्थित अंबाजी मंदिर या अरासुरी अंबाजी मंदिर एक देवी का प्रमुख मंदिर है, जिनकी पूजा पूर्व वैदिक काल से की जाती रही है। अंबाजी माता मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह भारत का एक प्रमुख शक्तिपीठ है। नवरात्रि का उल्लासपूर्ण त्यौहार पूरे गुजरात में अंबाजी के प्रति श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जिसमें पवित्र माता के चारों ओर गरबा नृत्य किया जाता है। भाद्रवी पूर्णिमा के दिन यहाँ एक बड़ा मेला लगता है जिसमें देश-विदेश से लोग आते हैं।