बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस से एक यूजर ने सड़क किनारे लगे साइन बोर्ड का मतलब पूछा। पुलिस ने मतलब समझाते हुए जो बताया, उसकी नेटिजंस तारीफ कर रहे। नेटिजंस ने बेंगलुरु पुलिस से ऐसे ही और भी साइन बोर्ड तथा नियमों के बारे में बताने को कहा। 

बेंगलुरु। बेंगलुरु की ट्रैफिक पुलिस सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है। सड़क सुरक्षा और यूजर्स के मन में ट्रैफिक से जुड़े अन्य सवालों के जवाब वह पूरी सक्रियता से देती रही है। इसके अलावा, कई इंस्पायरिंग मैसेज पोस्ट कर लोगों को जागरूक भी करती है। हाल ही में बेंगलुरु में एक यात्री ने सड़क पर ऐसा साइन बोर्ड देखा, जिसके बाद वह उलझन में पड़ गया। 

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सफेद रंग के इस साइन बोर्ड के बैकग्राउंड में चार काले डॉट्स हैं। अनिरुद्ध मुखर्जी नाम से ट्विटर हैंडल चला रहे शख्स ने साइन बोर्ड की फोटो शेयर किया और इसे बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस को टैग करते हुए लिखा, यह कौन सा ट्रैफिक सिग्नल है? इसे होपफॉर्म सिग्नल से ठीक पहले लगाया गया है। मुखर्जी के इस सवाल पर संबंधित व्हाइट फील्ड इलाके की ट्रैफिक पुलिस ने इसका मतलब समझाते हुए लिखा, बोर्ड यात्रियों से सावधानी बरतने का आग्रह करता हैं, क्योंकि हो सकता है थोड़ी दूर पर कहीं कोई दृष्टिहीन व्यक्ति सड़क पार कर रहा हो। 

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बेंगलुरु पुलिस ने साइन बोर्ड का मतलब समझाते हुए लिखा, डियर सर, यह एक चेतावनी वाला साइन बोर्ड है, जो आगाह करता है कि आसपास आगे कहीं कोई दृष्टिहीन व्यक्ति सड़क पार कर रहा होगा, क्योंकि जहां ये बोर्ड लगा है, उसके पास में ही दृष्टिहीन लोगों के लिए एक स्कूल है। वहां से लोग निकलते रहते हैं। 

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ट्रैफिक पुलिस के इस ट्वीट के जवाब में यूजर्स ने भी कमेंट किए हैं। एक यूजर ने लिखा, जानकारी देने के लिए धन्यवाद। मुझे इसके बारे में पता नहीं था। दूसरे यूजर ने लिखा, यह महत्वपूर्ण जानकारी है। बहुत से लोग सड़क पर लगे ऐसे कई संकेतों और उनके मतलब से अनजान हैं। इस बीच, एक अन्य यूजर ने लिखा, बहुत अच्छा बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस। आप ट्विटर पर ऐसे ही कुछ नियमों और संकेतों की जानकारी पोस्ट करते रहें, इससे हमें यह सब जानने में मदद मिलेगी। हालांकि, एक ट्विटर यूजर ने दावा किया कि एमवी एक्ट (मोटर व्हीकल एक्ट) के तहत ऐसा कोई साइन बोर्ड नहीं है। 

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हाल ही में, बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने शहरी आवाजाही को आसान बनाने के लिए Google के साथ करार किया है। बेंगलुरु में संयुक्त यातायात आयुक्त बीआर रविकांत गौड़ा के अनुसार, यह पहली बार है, जब भारत का कोई पुलिस विभाग सीधे Google के साथ काम करेगा। 

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