यूरोप से भारत लौटने की सोच रहे एक NRI जोड़े ने बेंगलुरु की खराब सड़कों, ट्रैफिक व झुग्गियों पर निराशा जताई। सोशल मीडिया पर उनके अनुभव ने बहस छेड़ दी, जिसमें लोगों ने सलाह और आलोचना दोनों दी। वे यूरोप में उच्च टैक्स से परेशान होकर लौटना चाहते हैं।

एक तरफ जहां भारत से युवा अच्छी नौकरी और सैलरी के लिए देश छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से विदेश में रह रहे कई NRI अब अपने देश वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं। इसी बीच, सालों बाद विदेश से लौटकर भारत में बसने की कोशिश कर रहे एक NRI परिवार के सवाल ने सोशल मीडिया यूजर्स को दो गुटों में बांट दिया है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

टूटी सड़कें और झुग्गियां

यूरोपीय पासपोर्ट वाले भारतीय मूल के एक कपल ने देश वापस लौटने का प्लान बनाया। लेकिन, बेंगलुरु की उनकी पहली यात्रा ने ही उन्हें निराश कर दिया। जब उन्होंने शहर के रहन-sहन को लेकर अपनी चिंता सोशल मीडिया पर शेयर की, तो लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं। रेडिट पर अपना अनुभव शेयर करते हुए इस NRI ने लिखा कि बेंगलुरु का ट्रैफिक भयानक है। उन्होंने लिखा कि सड़कों पर गड्ढे और लंबी दूरी की यात्रा एक बुरे सपने जैसी थी।

उन्होंने आगे लिखा कि वह और उनकी पत्नी एक अपार्टमेंट खरीदने की सोच रहे हैं, लेकिन उन्होंने जितने भी प्रोजेक्ट देखे, वहां तक पहुंचने के रास्ते और ट्रांसपोर्ट की हालत खराब थी। रविवार को भी वहां इतनी भीड़ और शोर-शराबा रहता है कि शांति से रहना मुश्किल लगता है। सिर्फ ट्रैफिक ही नहीं, ज्यादातर हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के पास कोई न कोई झुग्gi-बस्ती होती है। उन्होंने सवाल किया कि विदेश से आने वाले लोग इसके साथ कैसे तालमेल बिठा सकते हैं? उन्होंने पूछा, 'क्या बेंगलुरु में ऐसी कोई जगह है जहां सड़कें टूटी न हों और झुग्गियां न हों? या फिर यह सब देखकर भी अनदेखा करना पड़ता है?' साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि यूरोप में ज्यादा टैक्स और बच्चों की परवरिश में आने वाली मुश्किलों की वजह से वे भारत वापस आना चाहते हैं।

आलोचना के साथ मिला समर्थन भी

कुछ लोगों ने उन्हें सलाह दी कि अगर शहर में रहना है तो किसी मेट्रो स्टॉप के पास घर देखें। वहीं, कई लोगों ने उनकी आलोचना भी की। कुछ ने सवाल किया कि 'अगर आप यूरोप और भारत में नहीं रह सकते, तो फिर कहां रहेंगे?' कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि ‘जब आप यूरोप गए थे, तो क्या आपने यह जानने की कोशिश नहीं की कि आपका अपना देश कैसे आगे बढ़ रहा है?’