जया किशोरी के महंगे बैग को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। भौतिकता पर प्रवचन देने वाली जया किशोरी के इस बैग पर लोग सवाल उठा रहे हैं। क्या वाकई में ये विरोधाभास है?

इंसान की निराशा का कारण भौतिकता और दूसरी सांसारिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक लगाव है, ऐसा सभी धर्मों के आध्यात्मिक गुरुओं का दावा होता है। वहीं, सबसे अधिक संपत्ति मंदिरों में होती है। यह विरोधाभास सभी धर्मों में दिखता है। उसी तरह, सभी आध्यात्मिक गुरुओं की सलाह है कि सांसारिक चीजों से विरक्त रहकर जीवन में शांति पाई जा सकती है। लेकिन, अक्सर हम देखते हैं कि बातें और कर्म अलग-अलग होते हैं। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद यूजर्स दो गुटों में बंट गए और बहस शुरू हो गई। 

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खुद को कृष्ण भक्त बताने वाली आध्यात्मिक मोटिवेशनल स्पीकर और भजन गायिका जया किशोरी का 210,000 रुपये का डायर बैग लिए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। वीणा जैन नाम की एक एक्स यूजर ने एयरपोर्ट पर बैग लिए जया किशोरी का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता जया किशोरी ने अपना वो वीडियो डिलीट कर दिया जिसमें वो 210,000 रुपये का डायर बैग लिए दिख रही थीं। वो भौतिकता के खिलाफ प्रवचन देती हैं और खुद को श्रीकृष्ण भक्त बताती हैं। एक और बात: डायर बैग बछड़े के चमड़े से बनता है।' 

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जया किशोरी ने जो वीडियो शेयर किया और बाद में विवाद होने पर डिलीट कर दिया, वो कई सोशल मीडिया हैंडल्स पर शेयर हो चुका था। वीडियो को पांच लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। कई लोगों ने जया किशोरी के दोहरेपन पर सवाल उठाए। कुछ ने पूछा कि एक बात कहना और दूसरा करना क्या सही है? कुछ ने आलोचना की कि वो बैग जैसी चीजें खरीदते समय यह भी नहीं देखतीं कि वो जानवरों के अंगों से बनी है या नहीं। वहीं, जया किशोरी के प्रशंसक उनके बचाव में उतर आए। कुछ ने कहा कि जया किशोरी को भौतिकता से विरक्त होने के लिए उन्हें सन्यासिनी होने की जरूरत नहीं है, वो एक कथावाचक हैं। जया किशोरी सातवीं कक्षा से ही आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता के रूप में जानी जाती हैं। नारायण कथा, शिवमहापुराण जैसे धार्मिक प्रवचन, भजन और कीर्तन के जरिए वो उत्तर भारत और विदेशों में काफी लोकप्रिय हैं।