लंबे समय से हवाला कारोबार में शामिल है। रिश्तेदार ट्रांसपोर्टर प्रवीण जैन के जरिये रकम इधर से उधर भेजी जाती थी। इसके लिए कमीशन भी सेट था। कमीशन कैश में दिया जाता था। इसके चलते ही बेहद कम समय में बेशुमार दौलत जमा हो गई। जीजीआई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयकर विभाग, ईडी, ईओडब्ल्यू या अन्य जांच एजेंसी भी जांच शुरू कर सकती हैं।

लखनऊ: इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर से 181 करोड़ नकदी मिलने के बाद जांच का दायर भी बढ़ गया है। महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) अहमदाबाद की टीम ने इत्र कारोबारी पीयूष जैन (Piyush Jain) को आनंदपुरी स्थित आवास से शुक्रवार देर रात हिरासत में ले लिया। डीजीजीआई के सर्वोदय नगर स्थित कार्यालय में पीयूष से पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद टीम इत्र कारोबारी पीयूष को अपने साथ कन्नौज ले गई। उसके कन्नौज स्थित घर के फिंगर लॉक वाले लॉकरों को खुलवाया गया। डीजीजीआई की टीम ने रुपयों की गिनती के लिए मशीन मंगवाई। लगातार 51 घंटे की कार्रवाई के बाद 177 करोड़ रुपये आनंदपुरी स्थित घर से और चार करोड़ कन्नौज से बरामद हुए हैं। आपको बता दें कि इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद हवाला कारोबार की दिशा में भी जांच शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार पीयूष जैन कानपुर, मुंबई, दिल्ली के अन्य कारोबारियों के साथ मिलकर लंबे समय से हवाला कारोबार में शामिल है। रिश्तेदार ट्रांसपोर्टर प्रवीण जैन के जरिये रकम इधर से उधर भेजी जाती थी। इसके लिए कमीशन भी सेट था। कमीशन कैश में दिया जाता था। इसके चलते ही बेहद कम समय में बेशुमार दौलत जमा हो गई। डीजीजीआई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयकर विभाग, ईडी, ईओडब्ल्यू या अन्य जांच एजेंसी भी जांच शुरू कर सकती हैं। 

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पीयूष के सभी ठीकानों पर हुई थी रेड
टैक्स चोरी कि आशंका में बुधवार को शिखर पान मसाला, गणपति ट्रांसपोर्ट के यहां डीजीजीआई की टीमों ने छापा मारा था। इस रेड के आधार पर डीजीजीआई के हाथ इत्र कारोबारी पीयूष जैन तक पहुंचे। पीयूष के कानपुर, कन्नौज, गुजरात, मुंबई स्थित घर, फैक्ट्री, ऑफिस, कोल्डस्टोरेज और पेट्रोल पंप पर कार्रवाई शुरू की गई। इत्र कारोबारी पीयूष जैन की कंपनी मेसर्स ओडोचेम कंपनी कन्नौज में इत्र का कारोबार करती है। 

एसबीआई स्थित मुख्यालय में जमा कराया गया कैश 
पीयूष जैन के यहां तीन दिन तक चली जांच के बाद 42 बक्सों के जरिये कैश एसबीआई स्थित मुख्यालय में जमा कराया गया है। नोट गिनने के लिए 14 मशीनें लगी थीं। बताया गया कि शुक्रवार रात करीब ढाई बजे नोटों की गिनती पूरी हो सकी थी। इसके बाद टीम ने इत्र कारोबारी को हिरासत में ले लिया था। लाखों का माल, 50 हजार से कम बिल्टी बनाकर घपला किया। तीनों कारोबारी आपस में सांठगांठ कर फर्जी ई-वे बिल, इनवाइस के जरिये माल इधर उधर भेजते थे। ई-वे बिल से बचने के लिए ज्यादातर ये लोग 50 हजार से कम के माल की बिल्टी बनाते थे। भले ट्रक में माल लाखों का भरा हो। कुछ समय पहले गुजरात में ऐसे ही फर्जीवाड़े में पकड़े गए ट्रकों के आधार पर टीम यहां तक पहुंची थी।