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बीजेपी के इस विधायक का नाम अटल बिहारी वाजपेयी ने रख दिया था 'आपातकालीन', ये है वजह

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में लगाया आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे बड़ी घटना है। आपातकाल 21 महीने के लिए लगाई गया था।

Atal Bihari vajpayee Death Anniversary interesting Story of Emergency
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Varanasi, First Published Aug 16, 2019, 4:07 PM IST
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वाराणसी. 16 अगस्त शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि मनाई गई। वाराणसी के कैंट से विधायक सौरभ श्रीवास्तव के जीवन से एक शानदार याद अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जुड़ी हुई है। उन्होंने उस याद को शेयर करते हुए बताया कि 8 अगस्त, 1975  को उनका जन्म कृष्ण मिशन में हुआ था और देश में उस वक्त आपातकाल लगा हुआ था। अटल को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया था। इसी दौरान उनका जन्म हुआ था। पिता जी से इसकी सूचना मिलते ही अटल ने सौरभ का नाम आपातकाल रख दिया था। बाद में सभी उन्हें आपातकालीन कहकर पुकारते थे। 

100 नदियों में प्रवाहित हुई थीं अस्थियां 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त, 2018 को हुआ था। निधन के बाद BJP ने उनकी अस्थियों को देश की 100 नदियों में प्रवाहित किया था। इसकी शुरुआत हरिद्वार की गंगा नदी में विसर्जन के साथ हुई थी। अपनी कविताओं और भाषणों के लिए हमेशा जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के संस्थापकों में से एक थे।

आयोजित किया गया बड़ा कार्यक्रम

दिल्ली स्थित 'सदैव अटल' पर अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर भजन का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया और श्रद्धांजलि दी गई। अटल बिहारी वाजपेयी की बेटी नमिता कौल भट्टाचार्य, पोती निहारिका समेत परिवार के भी कई अन्य सदस्य वहां पर पहुंचे हैं। बता दें, अटल ने शादी नहीं की थी। उन्होंने नमिता कौल को गोद लिया था।

कब लगा था आपातकाल 

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में लगाया आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे बड़ी घटना है। आपातकाल 21 महीने के लिए लगाई गया था। 25-26 जून से 21 मार्च 1977 (21 महीने) के लिए भारत में आपातकाल घोषित किया गया था। तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी थी।

ये था आपातकाल का कारण 

1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी ने अपनी पार्टी को जबरदस्त जीत दिलाई थी और खुद भी बड़े मार्जिन से जीती थीं। खुद इंदिरा गांधी की जीत पर सवाल उठाते हुए उनके चुनावी प्रतिद्वंद्वी राजनारायण ने 1971 में इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर इंदिरा गांधी के सामने रायबरेली लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने वाले राजनारायण ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि इंदिरा गांधी ने चुनाव जीतने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया है। मामले की सुनवाई हुई और इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त कर दिया गया। इस फैसले से गुस्साई इंदिरा गांधी ने इमर्जेंसी लगाने का फैसला लिया।

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