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वेदांती ने कहा-सुन्नी वक्फ बोर्ड गांधी परिवार के इशारों पर कर रहा काम, SC को करना चाहता है गुमराह

यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा अयोध्या मामले में अपना केस वापस लेने के फैसले को राम जन्म भूमि के कार्यकारी अध्यक्ष रामविलास वेदांती ने साजिश करार दिया है। hindi.asianetnews.com से बातचीत में वेदांती ने कहा, सुन्नी वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने करने के लिए ऐसा कर रहा है।

ayodhya case ram vilas vedanti on sunni waqf board withdraws decision
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Ayodhya, First Published Oct 16, 2019, 1:06 PM IST
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अयोध्या (Uttar Pradesh). यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा अयोध्या मामले में अपना केस वापस लेने के फैसले को राम जन्म भूमि के कार्यकारी अध्यक्ष रामविलास वेदांती ने साजिश करार दिया है। hindi.asianetnews.com से बातचीत में वेदांती ने कहा, सुन्नी वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने करने के लिए ऐसा कर रहा है। वो जानता है कि फैसला हिंदूओं के पक्ष में आएगा। रामलला का जहां जन्म हुआ, वहीं उनका मंदिर बनेगा। केस वापस लेने की बात कहकर वो मामले को लटकाना चाहता है। ऐसा वो सोनिया, प्रियंका और राहुल गांधी के इशारों पर कर रहा है। बोर्ड नहीं चाहता कि अयोध्या का फैसला आए। बता दें, बुधवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, अब बहुत हो चुका। शाम 5 बजे तक दोनों पक्ष बहस पूरी करें।

8 मुस्लिम पक्षकारों में मुख्य है सुन्नी वक्फ बोर्ड
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मामले में दायर अपना केस वापस लेने के लिए मध्यस्थता पैनल के जरिए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। बोर्ड अपना केस वापस लेना चाहता है। अयोध्‍या में रामजन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में आठ मुस्लिम पक्षकारों ने केस दायर किए हैं। मुख्‍य पक्षकार सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड की ओर से दो केस दायर किए गए हैं। जिसे बोर्ड वापस लेना चाहता है। 

हाईकोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था जमीन का एक हिस्सा
बता दें, अयोध्या विवाद पहली बार 1885 में कोर्ट पहुंचा था। निर्मोही अखाड़ा 134 साल से जमीन पर मालिकाना हक मांग रहा है। जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड भी 58 साल से यही मांग कर रहा है। 18 दिसंबर 1961 को बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने केस दायर किया था। 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटा गया, जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया। 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। 

केस वापस लेने के फैसले के पीछे ये हो सकती है वजह 
बता दें, योगी सरकार ने यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा गलत तरीके से कई जमीनों की खरीद और ट्रांसफर कराने की शिकायतें मिलने के बाद मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की है। प्रयागराज कोतवाली में 26 अगस्त 2016 और 27 मार्च 2017 को लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में दर्ज केसों को जांच की सिफारिश के लिए आधार बनाया गया है। इस सिफारिश में खरीद-फरोख्त के अलावा दोनों बोर्ड की वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच की मांग की गई है। हालांकि, अभी तक भेजे गए दोनों मामले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई मामला नहीं है। माना जा रहा है कि इसी चलते सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अयोध्या मामले में अपना केस वापस लेने का फैसला किया।
 

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