यूपी चुनाव से पहले नेताओं का पाला बदलने का सिलसिला जारी है। नेताओं को भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने सदस्यता दिलाई। सिधौली सीट से 2012 में विधायक रहे मनीष समाजवादी पार्टी की पूर्व सांसद सुशीला सरोज के दामाद हैं।

लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव (UP Vidhansabha Election) के पहले चरण में मात्र 12 दिन शेष रह गए लेकिन नेताओं का पाला बदलने का सिलसिला जारी है। लखनऊ में शनिवार को बहुजन समाज पार्टी के पूर्व मंत्री डॉ. रंगनाथ मिश्रा के साथ समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक मनीष रावत अपने समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। सभी नेताओं को भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रति जनता का भरोसा कायम है। 2017 की तरह इस बार भी 2022 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनना तय है।

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बता दे कि मायावती की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे रंगनाथ मिश्रा भदोही की औराई सीट से विधायक हुआ करते थे। उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद कहा कि भाजपा की जन कल्याणकारी नीतियों से प्रभावित होकर उन्होंने यह फैसला लिया है। 2012 में सत्ता से विमुख होने के बाद बसपा अपने उसूलों से भटकती चली गई। इसके चलते अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और दलित खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। वह बीते दिनों भाजपा के नेताओं के साथ काफी सक्रिय भी थे। भाजपा की सदस्यता रंगनाथ मिश्रा के साथ उनके समर्थकों ने भी ली है। 

आपको बता दे कि मनीष रावत सिधौली से 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। समाजवादी पार्टी से टिकट कटने के बाद पूर्व विधायक मनीष रावत जनता के बीच जाकर फूट-फूटकर रोए थे। साथ ही उन्होंने पार्टी पर गंभीर आरोप भी लगाए। टिकट कटने से दुखी मनीष रावत ने बगैर किसी का नाम लिए सपा पर निशाना साधा और कहा कि आखिरकार पैसा जीत ही गया और सिधौली की जनता की मेहनत हार गई। समाजवादी पार्टी ने इस बार उनकी जगह पर बसपा से सपा में शामिल होने वाले हरगोविंद भार्गव को प्रत्याशी बनाया है। मनीष रावत पूर्व सांसद सुशीला सरोज के दामाद भी हैं और इस बार समाजवादी पार्टी ने उन्हें मलिहाबाद से प्रत्याशी बनाया है।