गोरखपुर (Uttar Pradesh) । गोरखपुर शहर से भाजपा विधायक डा. राधा मोहन दास अग्रवाल इस समय सुर्खियों में आ गए हैं। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर कोरोना वायरस और लॉकडाउन को लेकर 9 बिंदुओं पर अपनी बात रखी है। पेशे से डॉक्टर और चार बार सदर सीट से बीजेपी से विधायक डॉ. अग्रवाल ने अपने फेसबुक पेज पर यहां तक लिखा है कि जब शहर में कोरोना संक्रमण का एक भी मामला नहीं था, तब लॉकडाउन का पूरा तरह से पालन कराया जा रहा था, लेकिन अब जिले में 60 कोरोना संक्रमित मामले हैं और पांच मरीजों की मौत हो चुकी है, जब बाजार खोले जाने का क्या औचित्य है। क्योंकि कोरोना के 80% मरीजों में बीमारी के कोई लक्षण नहीं होते हैं, वे कैसे समझेंगे कि किसे कोरोना नहीं है और अगर इस चक्कर में दुकानदार या सेल्समैन्स को कोरोना हो गया, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

विधायक ने कहा, सीएम से किया खुलकर विरोध
गोरखपुर शहर विधायक डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल ने फेसबुक पोस्ट पर 9 बिंदुओं में अपनी बात रखी है। साथ ही लिखा है कि हमने माननीय मुख्यमंत्री जी से खुलकर विरोध किया है, ताकि नगर विधायक के रूप में मैं कतई जिम्मेदार न बनूं। हमारा पक्ष बहुत ही स्पष्ट है, पूरी तरह से वैज्ञानिक है और रहेगा।

विधायक ने किया ये सवाल
विधायक ने फेसबुक पर लिखा है कि जब गोरखपुर में कोई मरीज नहीं था, तो 100% लॉकडाउन था, लेकिन आज जब 60 मरीज हो गए और 5 मौतें हो गई तो सारे के सारे बाजार खोल दिए गए। ये कौन सा विज्ञान है, ये हमारी समझ के बाहर है।

बाजार बंद करने का दिया ये तर्क
विधायक आगे लिखा कि मुख्यमंत्री का बयान है कि मुंबई के 75%, दिल्ली के 50% और अन्य जगहों के 26% मजदूर कोरोना से संक्रमित हैं। गोरखपुर पूरे भारत में सबसे अधिक मजदूरों को लाने का सेंटर बना। अबतक 194 श्रमिक ट्रेनें जिले में आ चुकी हैं, जिनमें कम से कम 2 लाख 25 हजार लोग आ चुके हैं। मुख्यमंत्री के बयान के आधार पर जोड़ लीजिए कितने कोरोना संभावित मरीज आए होंगे।

इस तरह किया जाए काम
विधायक ने कहा कि हमारा कहना सिर्फ इतना है कि जितने भी संक्रमित मरीजों को बुलाना हो बुला लीजिए। लेकिन, पूरे शहर को संक्रमित मत करिये। इन्हें नियमानुसार होम-क्वारंटाइन कर दीजिए और फिर कुछ दिन रुककर जब तय हो जाए कि इन श्रमिकों से बीमारी अब नहीं फैलेगी, तो सिर्फ दुकान ही क्यों स्कूल, सिनेमा हॉल, मॉल, अस्पताल सबकुछ खोल दीजिए।

सेल्समैन को कोरोना हो गया तो...
विधायक ने कहा कि ये हमारे समझ के बाहर है कि गैर-कोरोना के अन्य मरीजों का इलाज नहीं होगा, लेकिन कपड़े, होजरी और गहने बिकने जरूरी है। हम दुकानों के खुलने के खिलाफ नहीं है, हमें चिंता दुकानदारों और उनके सेल्समैन्स की है। कोरोना के 80% मरीजों में बीमारी के कोई लक्षण नहीं होते हैं, वे कैसे समझेंगे कि किसे कोरोना नहीं है और अगर इस चक्कर में उन्हें या सेल्समैन्स को कोरोना हो गया, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?