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राज्यमंत्री का टिकट कटने से, बिगड़ सकते हैं बीजेपी के समीकरण, जाटलैंड पर होगी वर्चश्व की जंग

उत्तर प्रदेश विधानसभा 2017 के चुनाव में बीजेपी ने आगरा की सभी नौ सीटों पर क्लीन स्वीप किया था। पार्टी का हर उम्मीदवार बड़े अंतराल से चुनाव जीता था, लेकिन अब उनकी पार्टी के प्रत्याशियों के सामने विपक्षी दलों के साथ-साथ उनकी पार्टी के ऐसे निर्वतमान विधायक भी हैं जिनकी टिकट कट चुकी है और उनके समर्थक विरोध से भरे हुए हैं। 

BJP s equations may deteriorate due to the cut of the ticket of the Minister of State there will be a war of supremacy on Jatland
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Lucknow, First Published Jan 16, 2022, 3:39 PM IST

आगरा: साल 2017 के विधानसभा चुनाव (Vidhansabha Chunav) में बीजेपी ने आगरा की सभी नौ विधानसभा सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। अपने इस किले को बचाने के लिए एक बार फिर से बीजेपी (BJP) के लड़ाके मैदान में हैं, लेकिन इस बार पांच विधायकों की टिकट काटे जाने से बीजेपी की कई सीटें प्रभावित हो सकती हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा 2017 के चुनाव में बीजेपी ने आगरा की सभी नौ सीटों पर क्लीन स्वीप किया था। पार्टी का हर उम्मीदवार बड़े अंतराल से चुनाव जीता था, लेकिन अब उनकी पार्टी के प्रत्याशियों के सामने विपक्षी दलों के साथ-साथ उनकी पार्टी के ऐसे निर्वतमान विधायक भी हैं जिनकी टिकट कट चुकी है और उनके समर्थक विरोध से भरे हुए हैं। बीजेपी ने नौ सीटों में से पांच सिटिंग एमएलए के टिकट काट दिए हैं। जिनमें एक राज्यमंत्री उदयभान चौधरी (Udaybhan Chaudhary) भी शामिल हैं। मिनी छपरौली मानी जाने वाली फतेहपुरसीकरी में बीजेपी के समीकरण बदल सकते हैं। जाट बाहुल्य इस सीट पर कई जाट नेता टिकट की दावेदारी में जुटे थे। इधर सपा और आरएलडी (SP-RLD) गठजोड़ के प्रत्याशी भी जाट हैं। किसान आंदोलन और छोटे चौधरी के प्रति संवेदनाएं उन्हें जाटों के वोट दिलवा सकती है। जो कि बीजेपी के प्रत्याशी की जीत में रोड़ा साबित हो सकता है। 


जाटलैंड फतेहपुरसीकरी विधानसभा सीट (Fatehpursikri Assembly seat) पर जाट नेताओं का दबदबा रहा है। हालांकि वर्ष 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी के ठाकुर सूरजपाल ने यहां से लगातार दो बार जीत हासिल की है, लेकिन 2017 में इस सीट पर चौधरी उदयभान सिंह ने सूरजपाल को हराकर बीजेपी को जीत दिलाई थी। बीजेपी ने राज्यमंत्री उदयभान सिंह का टिकट काट दिया है। उदयभान सिंह इस सीट पर अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन बीजेपी ने चौधरी बाबूलाल को प्रत्याशी घोषित किया है। टिकट की घोषणा होने के बाद चौधरी बाबूलाल का कड़ा विरोध शुरू हो गया। 

बदल सकता है समीकरण
फतेहपुरसीकरी विधानसभा सीट पर 3,55990 मतदाता हैं। इनमें करीब एक से सवा लाख जाट मतदाता हैं। इसके बाद इस सीट पर दलितों की संख्या है। 60 से 70 हजार दलित हैं। 27 हजार ठाकुर मतदाता हैं। 20 हजार लोधी-राजपूत हैं। करीब 15 से 20 मुस्लिम हैं। 10 हजार वैश्य मतदाता हैं। बीजेपी के नेताओं का विरोध जाट वोट बैठक को आरएलडी के खाते में भेज सकता है। इसके अलावा आरएलडी को मुस्लिम वोट भी मिलेगा। 

नाराज हैं बीजेपी के नेता
चौधरी बाबूलाल को टिकट दिए जाने के बाद से बीजेपी के तमाम नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है। बीजेपी के जिलाध्यक्ष रहे जितेंद्र फौजदार के समर्थन में जाट नेताओं ने शनिवार को बैठक कर जमकर विरोध किया था। इसके अलावा किसानमोर्चा के प्रशांत पौनिया, अशोक राना, यशपाल राणा, हितेंद्र इंदौनिया और मिशन मोदी के जिलाध्यक्ष भूपसिंह भी पिछले कई सालों से चुनाव लडऩे की तैयारियों में जुटे थे। सूत्र बतातें हैं कि बीजेपी प्रत्याशी चौधरी बाबूलाल से जिला पंचायत चुनाव से ही जाट नेता खिलाफत में हैं। बाबूलाल ने अपनी पुत्रवधु को फतेहपुरसीकरी से जिला पंचायत का चुनाव लड़वाया था और वे बीएसपी समर्थित भोले चौधरी से चुनाव हार गईं थीं, जबकि यहां से जाट नेता भूपसिंह इंदौलिया को चुनाव लड़वाना चाहते थे। सत्ता की हनक में सांसद रहे चौधरी बाबूलाल ने अपनी पुत्रवधु को टिकट दिलवा दी थी।

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