लखनऊ के थाना मड़ियांव अंतर्गत क्षेत्र में साइकिल चला रहे मासूम को कुत्ते ने काट लिया। इस घटना के बाद मामले को लेकर तमाम विभागों से शिकायत की गई है। हालांकि इसकी जिम्मेदारी को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। 

लखनऊ: यूपी के अलग-अलग शहरों में कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में लखनऊ के कृष्णानगर के बाद अब मड़ियांव थाना अंतर्गत क्षेत्र से घटना सामने आई है। यहां सड़क पर घूमने वाले कुत्ते ने मासूम को निशाना बनाया। घटना शालीमार गार्डन बे सोसाइटी से सामने आई। यहां स्कूल जाने से पहले साइकिल चला रहे मासूम श्रेयांश मौर्या को कुत्ते ने काट लिया। मामले को लेकर उनके पिता डॉ श्रवण कुमार मौर्या के द्वारा शालीमार ग्रुप के अलावा स्थानीय थाने में भी शिकायत की गई है। इसी के साथ वह नगर निगम से भी मामले की शिकायत करने की बात कह रहे हैं। 

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साइकिल चला रहे बच्चे को कुत्ते ने बनाया निशाना 
मामले को लेकर डॉ श्रवण कुमार मौर्या ने बताया कि शुक्रवार की सुबह बच्चा स्कूल जाने के लिए तैयार था। हालांकि वैन आने में देरी के चलते वह साइकिल लेकर सोसाइटी में निकल गया। ई-रो में जैसे ही वह पहुंचा तो वहां पर आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। आनन फानन में बच्चे को कैरियर हॉस्पिटल में जाया गया। मामले को लेकर सोसाइटी को भी सूचना दे दी गई। पहले भी हम लोगों के द्वारा इन कुत्तों को लेकर शिकायत की जा चुकी थी लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। सोसाइटी के ही एक व्यक्ति के द्वारा इन आवारा कुत्तों को भोजन आदि दिया जाता है जिसके चलते भारी संख्या में वह यहां पर घूमते रहते हैं। 

आवारा कुत्तों को लेकर नगर निगम की भी सीमाएं 
लखनऊ विकास प्राधिकरण के वीसी इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि नगर निगम ही कुत्ते का लाइसेंस देता है और यह तमाम जिम्मेदारी उसी की होती हैं। बिल्डिंग बनाकर देने का काम लखनऊ विकास प्राधिकरण करता हैं। इसके बाद उसमें कोई डेयरी खोल ले, कुत्ता या बिल्ली बिना लाइसेंस के पाल ले यह सब जिम्मेदारी नगर निगम की है। वहीं नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी अभिनव वर्मा ने बताया कि नगर निगम हाईकोर्ट के नियमानुसार चल रही है। हम लोग एबीसी डाग रूल्स यानि एनिमल बर्थ कंट्रोल डॉग रूल्स 2001 के अनुसार स्ट्रीट डॉग्स को पकड़कर नसबंदी के बाद वहीं पर छोड़ देते हैं। पिछली बार भी लखनऊ में कई घटनाएं सामने आने के बाद कुत्तों को हटाने को लेकर लखनऊ नगर निगम ने रिट डायर करने का विचार किया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर इसमें आगे काम नहीं हुआ। नगर निगम सभी जगहों पर काम कर रहा है लेकिन नियमों के चलते कुत्तों को हटाया नहीं जा सकता है। 

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