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ज्ञानवापी केस: श्रृंगार गौरी मामले पर पूरी हुई सुनवाई, कोर्ट 8 नवंबर को देगी अपना फैसला

ज्ञानवापी मस्जिद और श्रंगार गौरी मामले की सुनवाई पूरी हो गई है। कोर्ट ने मामले पर आदेश के लिए 8 नवंबर की अगली तारीख तय की है। इससे पहेल 15 अक्टूबर को हिंदू और मुस्लिम पक्ष की बहस हुई थी। 

Gyanvapi case Hearing on Shringar Gauri case completed court will pronounce its verdict on November 8
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First Published Oct 27, 2022, 4:16 PM IST

वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद की जिला अदालत में श्रृंगार गौरी मामले पर गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई है। कोर्ट ने आदेश के लिए 8 नवंबर की तारीख तय की है। बता दें कि भगवान आदि विश्वेश्वर के विराजमान का मामला सुनवाई योग्य है या नहीं, इस पर आज सिविल जज सीनियर डिवीजन महेंद्र प्रसाद पांडेय की फास्ट ट्रैक कोर्ट में फैसला आना था। इस मामले पर 15 अक्टूबर को हिंदू और मुस्लिम पक्ष की बहस हुई थी। मामले की बहस के बाद कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख आज यानि की 27 तारीख नियत की थी। अदालत ने अगली सुनवाई तक फैसले को अपने पास सुरक्षित रख लिया है। 

ट्रायल के बाद सामने आएगी सच्चाई- हिंदू पक्ष
अदालत में 15 अक्टूबर लॉर्ड आदि विश्वेश्वर के नेक्स्ट फ्रेंड किरन सिंह की तरफ से मानबहादुर सिंह, शिवम गौड़ और अनुपम द्विवेदी ने दलीलें पेश की थी। जिसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा है कि वाद सुनवाई योग्य है या नहीं, इस मुद्दे पर अंजुमन इंतजामिया कमेटी की ओर से जो मुद्दा उठाया गया है वह भी साक्ष्य और ट्रायल का विषय है। हिंदू पक्ष ने कहा कि पिलर और फंउंडेशन मंदिर का है। इस दौरान जब उसका ट्रायल किया जाएगा तो पता चलेगा कि वह मस्जिद है या मंदिर। 

मई 2022 को हुआ था ज्ञानवापी परिसर का सर्वे
वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह केस सुनवाई के योग्य नहीं है। इस बारे में मुस्लिम पक्ष ने अपना तर्क देते हुए कहा कि ज्ञानवापी वक्फ की संपत्ति है और यां 'दि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991' लागू होता है। ऐसे में इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार सिविल कोर्ट के पास नहीं होना चाहिए। बता दें कि कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी परिसर का सर्वे मई 2022 में किया गया था। इस सर्वे के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने से शिवलिंग रूप की आकृति मिली थी। जिसके बाद हिंदू पक्ष ने मांग की थी कि ज्ञानवापी के वजूखाने में मिले कथित शिवलिंग की पूजा-अर्चना का अधिकार दिया जाना चाहिए और वहां पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित किया जाना चाहिए।

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