मायावती ने संशोधित नागरिकता क़ानून (सीएए) में पाकिस्तान के शोषित पीड़ित अल्पसंख्यकों के साथ मुस्लिमों को भी नागरिकता देने की पैरवी करते हुए इस मामले में सरकार के फ़ैसले पर प्रश्नचिह्न लगाया है।

नई दिल्ली. बसपा अध्यक्ष मायावती ने संशोधित नागरिकता क़ानून (सीएए) में पाकिस्तान के शोषित पीड़ित अल्पसंख्यकों के साथ मुस्लिमों को भी नागरिकता देने की पैरवी करते हुए इस मामले में सरकार के फ़ैसले पर प्रश्नचिह्न लगाया है।

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मायावती ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, "पाकिस्तानी मूल के गायक अदनान सामी को जब भाजपा सरकार नागरिकता एवं पद्मश्री से भी सम्मानित कर सकती है तो फिर जुल्म-ज्यादती के शिकार पाकिस्तानी मुसलमानों को वहाँ के हिन्दू, सिख, ईसाई आदि की तरह यहाँ सीएए के तहत पनाह क्यों नहीं दे सकती है?"

मायावती ने सरकार से पुनर्विचार करने का अनुरोध किया

उन्होंने सीएए पर सरकार से पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हुए कहा, "अतः केन्द्र सीएए पर पुनर्विचार करे तो बेहतर होगा।"

उल्लेखनीय है कि संसद के पिछले शीतकालीन सत्र में पारित किए गए सीएए में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में धार्मिक हिंसा के कारण भारत आए हिंदू सहित अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है। इस क़ानून में मुस्लिमों को शामिल नहीं किए जाने का विपक्षी दल विरोध करते ही सरकार से सीएए को वापस लेने की माँग कर रहे है।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)