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Inside Story: एक ऐसी विधानसभा सीट जहां नहीं हुआ कभी विधायक रिपीट, जो रहा रनर उसने मारी बाजी

मिशन 2022 के लिए बरेली जनपद की आरक्षित विधानसभा सीट फरीदपुर को फिर जीतने के लिए भाजपा तो मजबूत रणनीति बनाए ही हुए है, सपा, बसपा और कांग्रेस भी अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटी हुई हैं। सपा के कई दावेदार गांव-गांव में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में लगे हुए हैं और खुद को संभावित प्रत्याशी बताते हुए तैयारी में जुटे हैं।

Inside Story Faridpur assembly seat where there was never MLA repeat who was the runner he won
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Lucknow, First Published Jan 16, 2022, 12:04 PM IST

राजीव शर्मा
बरेली
: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की नौ विधानसभाओं में से फरीदपुर विधानसभा सीट (FaridPur Vidhansabha Seat) आरक्षित सीट है। यह कई संयोग के लिए भी जानी जाती है। एक तो यह कि जिस चुनाव में यहां से जिस राजनीतिक दल का प्रत्याशी चुनाव जीता, उस चुनाव में उस पार्टी की ही सरकार उत्तर प्रदेश में बनी। दूसरा संयोग यह कि 1980 से लेकर 2017 तक के 10 चुनाव में इस सीट पर जो भी दूसरे नंबर पर रहा, वही अगली बार विधायक बना, तीसरा यह कि यहां कभी जनता ने लगातार किसी को विधायक नहीं बनाया। हर चुनाव में यहां के वोटर अपने विधायक की कुर्सी पर चेहरा बदलते रहे। पिछले चुनाव साल 2017 में भाजपा के डॉ. श्याम बिहारी लाल विधायक बने, जो उससे पहले 2012 में हुए चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे थे। पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे पूर्व विधायक डॉ. सियाराम सागर अब चूंकि जीवित नहीं हैं। ऐसे में, इस बार यह संयोग तो 11 वें चुनाव में टूटेगा ही, तीसरा संयोग भी मौजूदा विधायक भाजपा के डॉ. श्याम बिहारी लाल (Dr. Shyam Bihari Lal) तोड़ पाएंगे या नहीं, यह कहना अभी मुश्किल है। हालांकि उनको भाजपा (BJP) ने 2022 के चुनाव में फिर से प्रत्याशी बनाया है। लेकिन जनता उनको मौका देगी या नहीं, बात में ही पता लगेगा।

खूब चला है यहां दल-बदल का खेल
मिशन 2022 के लिए बरेली जनपद की आरक्षित विधानसभा सीट फरीदपुर को फिर जीतने के लिए भाजपा तो मजबूत रणनीति बनाए ही हुए है, सपा, बसपा और कांग्रेस भी अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटी हुई हैं। सपा के कई दावेदार गांव-गांव में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में लगे हुए हैं और खुद को संभावित प्रत्याशी बताते हुए तैयारी में जुटे हैं। हालांकि सबसे ज्यादा टिकट के दावेदार सपा के ही हैं। बसपा से विधायक रहे विजय पाल सिंह भी अब सपा में शामिल हो चुके हैं इसलिए बसपा से अभी कोई मजबूत चेहरा सामने नहीं आया है। सपा के प्रमुख दावेदारों में विजय पाल सिंह के अलावा ब्रहमस्वरूप सागर, हरीश लाखा प्रमुख हैं। भाजपा के मौजूदा विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल फिर से टिकट मिलने की पक्की उम्मीद के साथ चुनाव की तैयारी में जुटे हैं लेकिन भाजपा में और भी कुछ चेहरे यहां से टिकट मांग रहे हैं। इनमें पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष जवाहर लाल और पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया प्रमुख हैं। सपा छोड़ कर आए पूर्व जिला पंचायत संजय सिंह भी दावेदार बताए जा रहे हैं। ऐसे में, मौजूदा विधायक प्रो. श्याम बिहारी लाल को पहले मोर्चे पर अपने टिकट के लिए पार्टी के विश्वास की कसौटी पर जूझना है और टिकट मिलने के बाद उनको फरीदपुर की जनता की कसौटी पर खरा उतरने पर ही विधानसभा में फिर से बैठने का मौका मिल पाएगा।

यह हैं मुददे और जातीय समीकरण
शाहजहांपुर जिले की सीमा से लगी बरेली की फरीदपुर विधानसभा ग्रामीण बाहुल्य है। सर्वाधिक किसान हैं। यह नेशनल हाईवेदिल्ली-लखनऊ मार्ग पर स्थित है लेकिन विकास के मायने में पिछड़ी हुई है। क्षेत्र में कोई औदयोगिक विकास नहीं है। गांवों में बिजली और सड़क की दिक्कतें हैं। यहां के लोगों के सामने रोजगार का संकट रहता है। उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त साधन नहीं है। छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ता है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। सामान्य वर्ग में ब्राहमण और क्षत्रिय भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में भाजपा का पलड़ा भारी रहता है लेकिन प्रत्याशियों की स्थानीय पहचान भी मायने रखती है। यादव मतदाताओं की संख्या भी अच्छी होने से सपा दमदार भूमिका में नजर आती है। मुस्लिमों का रुख भी सपा की ओर रहता है। फिलहाल तो अनुमान यही है कि इस बार भी यहां के मतदाता स्थानीय विकास के मुददों से ज्यादा प्रत्याशियों के चेहरों को तव्वजो देंगे।  

चुनाव में कई मुददे
दरअसल, प्रो. श्यामबिहारी लाल भले ही विकास कार्यों का दावा करें लेकिन यह भी किसी से छुपा नहीं है कि कुछ विवादों से भी उनका नाता रहा है। हाल ही में, राशन कोटेदार की शिकायत करने के बाद भी उसको न हटाने पर भाजपा कार्यकर्ता की नाराजगी प्रकट करता एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें भाजपा कार्यकर्ता विधायक से वोट न मांगने आने की बात कह रहा है। हालांकि विधायक इसे अपने खिलाफ माहौल बनाने की विरोधियों की रणनीति करार देते हैं लेकिन विपक्षी नेताओं का कहना है कि विधायक ने ऐसे लोगों को संरक्षण दिया है, जो राशन माफिया हैं। दलाल हैं। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नेता और फरीदपुर से चुनाव की तैयारी कर रहे चंद्रसेन सागर कहते हैं कि विधायक आम जनता की सुनते ही नहीं हैं। थानों में पीड़ितों की सुनवाई नहीं होती। ऐसे में, फरीदपुर की जनता इस बार भाजपा को हराने का काम करेगी लेकिन विधायक प्रो. श्यामबिहारी लाल कहते हैं कि यह बातें सिर्फ विपक्षी दलों का शिगूफा महज हैं। भाजपा सरकार में जनता जितनी संतुष्ट है, उतनी किसी शासनकाल में नहीं रही। वह कहते हैं कि फरीदपुर ही नहीं, पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था पिछले साढ़े चार साल में दुरुस्त हुई है। लूट-खसोट और गुंडागर्दी खत्म हुई है। जनता राहत महसूस कर रही है। अलबत्ता, सपा से टिकट के दावेदार ब्रह़मस्वरूप सागर कहते हैं कि विधायक प्रो. श्याम बिहारी लाल ने पिछले साढ़े चार साल में क्षेत्र की जनता की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। लोग बिजली की समस्या लेकर गए, उनको भगा दिया। सही बात तो यह है कि इस सरकार में विधायकों की भी नहीं सुनी जा रही है।

फरीदपुर में अब तक के चुनाव परिणाम
चुनाव 2017
डॉ. श्याम बिहारी लाल भाजपा विजेता वोट- 83,656 अंतर- 24,721
डॉ. सियाराम सागर सपा दूसरे स्थान पर वोट- 58,935
 

चुनाव 2012
डॉ. सियाराम सागर सपा विजेता वोट- 60,837 अंतर- 16,787
डॉ. श्याम बिहारी भाजपा दूसरे स्थान पर वोट- 44,050
 

चुनाव 2007
विजय पाल सिंह बसपा विजेता वोट- 39,371 अंतर- 8,481
डॉ सियाराम सागर सपा दूसरे स्थान पर वोट- 30,890
 

चुनाव 2002
डॉक्टर सियाराम सागर सपा विजेता वोट- 39,106 अंतर- 238
विजय पाल सिंह भाजपा दूसरे स्थान पर वोट- 38,868

चुनाव 1996
नंद राम सपा विजेता वोट- 53,680 अंतर- 24,536
सियाराम सागर भाजपा दूसरे स्थान पर वोट- 29,144
 

चुनाव 1993
सिया राम सागर सपा विजेता वोट- 52,996 अंतर- 18,597
नंद राम भाजपा दूसरे स्थान पर वोट- 34,399 चुनाव 1991
नंद राम भाजपा विजेता वोट- 30,651 अंतर- 3,613
शियाराम सागर जेपी दूसरे स्थान पर वोट- 27,038

चुनाव 1989
सिया राम सागर आईएनडी विजेता वोट- 24,192 अंतर-1,761
नंदराम भाजपा दूसरे स्थान पर वोट- 22,431 चुनाव 1985
नाथू लाल विकाल कांग्रेस विजेता वोट- 21,621 अंतर- 6,261
सिया राम सागर आईसीजे दूसरे स्थान पर वोट- 15,360
 

चुनाव 1980
नंद राम भाजपा विजेता वोट- 18,206 अंतर- 3,991
नाथू लाल विकल इंका दूसरे स्थान पर वोट- 14,215
 

चुनाव 1977
सिया राम सागर जेएनपी विजेता वोट- 12,876 अंतर- 2,226
हेमराज कांग्रेस दूसरे स्थान पर वोट- 10,650

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