खाद्य एवं रसद विभाग की ओर से तैयार की गई व्यवस्था के बाद मोबाइल क्रय केंद्र के माध्यम से गांव-गांव जाकर गेहूं खरीद की जाएगी। इसको लेकर पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। सरकार ने गेहूं खरीद को लेकर जो लक्ष्य रखा था उसमें पीछे रहने के बाद यह पूरी रणनीति बनाई गई है। 

लखनऊ: प्रदेश की किसानों को अब गेंहू बेचने के लिए क्रय केंद्रों तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इसको लेकर खाद्य और रसद विभाग एक व्यवस्था तैयार कर रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत मोबाइल क्रय केंद्रों के माध्यम से गांव-गांव जाकर गेहूं खरीदा जाएगा। 

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5 हजार क्रय केंद्र किए गए हैं स्थापित
गौरतलब है कि वर्तमान में प्रदेशभर में सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद की जा रही है। इसके लिए लगभग साढ़े 5 हजार क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन क्रय केंद्रों पर किसी को भी परेशानी न हो इसके लिए पेयजल, छाया और अन्य जरूरी इंतजाम भी किए गए हैं। सरकार की ओर से किए गए कई प्रयासों के बावजूद बीते एक माह में महज 1.28 लाख मीट्रिक टन की गेहूं खरीद ही हो पाई है। हालांकि सरकार ने इसे साठ लाख टन का लक्ष्य रखा था। 

सरकार ने तैयार की है ये योजना
दरअसल खरीद में आ रही इस कमी का कारण है कि बाजार में गेहूं 2300 रुपए प्रति क्विंटल तक के भाव पर मिल रहा है। जबकि सरकारी केंद्रों पर गेहूं की एमएसपी 2015 रुपए प्रति क्विंटल ही है। इसी मूल्य पर गेहूं की खरीद हो रही है। इसके चलते सरकार का लक्ष्य काफी दूर दिखाई पड़ रहा है। खरीद बढ़ाने के लिए ही मोबाइल क्रय केंद्रों के माध्यम से गेहूं खरीदने का निर्णय लिया गया है। इसको लेकर क्रय केंद्र प्रभारी ग्रामीण क्षेत्र के उचित दर विक्रेताओं और ग्राम प्रधानों से बातचीत भी करेंगे। जिस गांव में खरीद के आसार होंगे वहां कांटा लगाकर गेहूं खरीदा जाएगा। इसके बाद ट्रक से इसे लोड कर सीधे भारतीय खाद्य निगम भेजा जाएगा। वहीं निगम से डिपो तक की वास्तविक दूरी का भुगतान टेंडर की दरों के अनुसार परिवहन विभाग के ठेकेदारों को किया जाएगा। 

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