अल्पसंख्यक छात्रों का पैसा डकारने वाले कई अधिकारी करोड़पति बन गए। इस मामले का खुलासा होने के बाद सामने आया कि मदरसे वालों से सेटिंग के चलते यह पूरा खेल हुआ। 

मेरठ: अल्पसंख्यक छात्रों का पैसा डकराने वाले विभाग के कई अधिकारी करोड़पति बन गए हैं। मदरसे के प्रधानाध्यापक और प्रबंधक ने भी काफी संपत्ति अर्जित कर ली। इस मामले में जांच पड़ताल करने के बाद 12 साल बाद ईओडब्ल्यू ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अब नामजद आरोपियों की पोल खुलती नजर आ रही है। छात्रवृत्ति घोटाले में नामजद आरोपियों की संपत्तियों का भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम की तलाश में ईओडब्ल्यू मेरठ ने दबिश देने की बात भी कही है।

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2012 में तत्कालीन डीएम से की गई थी शिकायत
दावा है कि 92 मुकदमों में अभी 180 आरोपी फरार है। इसमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कई पूर्व अधिकारी है। बताया है कि छात्रवृत्ति घोटाले में सुमन गौतम, संजय त्यागी, सलीम, खुर्शीदा, इकरामुद्दीन, दिलशाद, जहीन, ईशाक अंसारी, सैय्यद जफर, खुर्शीद अहमद, नूर आलम, आशा शर्मा, गुफरान आलम, इश्तियाक राणा, गुफरान आलम, मोहम्मद तहसीन समेत कई लोग नामजद हैं। इनकी संपत्ति का पता लगाने में ईओडब्ल्यू और मेरठ पुलिस लगी है। अल खिदमत फाउंडेशन अध्यक्ष तनसीर अहमद ने छात्रों ने पैसा हड़पने वाले अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और मदरसे चलाने वालों की शिकायत 2012 में तत्कालीन डीएम विकास गोठलवाल से की थी। इसके बाद यह मामला शासन स्तर तक पहुंचा। सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों से सेटिंग कर 2012 में एफआर लगा दी। शिकायत के बाद एफआर निरस्त कर मुकदमे में जांच हुई।

250 लोगों के नाम जांच में आए थे सामने
ईओडब्ल्यू की जांच में अल्पसंख्यक छात्रों के नाम से छात्रवृत्ति हड़पने को लेकर 96 स्कूल मदरसों के प्रधानाचार्य और प्रबंधकों का नाम भी शामिल था। इस मामले में दोबारा दबाने के लिए पूरा प्रयास किया गया। इसके बाद योगी सरकार के सत्ता में आने पर फिर से इस मामले की गंभीरता से विवेचना की गई। इसके बाद फिर से 250 लोगों के नाम प्रकाश में आए। आरोप है कि सरूरपुर थानाक्षेत्र के हर्रागांव निवासी दीन मोहम्मद ने 4 मदरसे बताकर 41 लाख रुपए की छात्रवृत्ति का गबन किया था। 

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