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CAA के विरोध में हिंसा पर पुलिस की सख्ती,पूर्व आईजी समेत 46 के खिलाफ कुर्की की नोटिस जारी

यूपी में CAA के विरोध में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने सख्त रवैया अपनाना शुरू कर दिया है। राजधानी लखनऊ में 19 दिसंबर को CAA के विरोध में हुए हिंसक झड़प व आगजनी के मामले में प्रशासन ने रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी है

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Lucknow, First Published Dec 26, 2019, 5:53 PM IST
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लखनऊ(Uttar Pradesh ). यूपी में CAA के विरोध में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने सख्त रवैया अपनाना शुरू कर दिया है। राजधानी लखनऊ में 19 दिसंबर को CAA के विरोध में हुए हिंसक झड़प व आगजनी के मामले में प्रशासन ने रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने लखनऊ में पूर्व आईजी,कांग्रेस नेता समेत 46 लोगों को कुर्की नोटिस भेजा है। इसके आलावा 100 से अधिक लोगों को क्षतिपूर्ति की भरपाई करने के लिए रिकवरी का नोटिस दिया गया है। 

बता दें कि यूपी में CAA के विरोध को लेकर 19 दिसंबर को हिंसा की आग अचनाक भड़क उठी थी । यह हिंसा अगले दिन भी जारी रही। सूबे के तकरीबन दो दर्जन जनपदों में CAA के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हजारों लोग सड़क पर उतर गए और जमकर कहर ढाया। कई गाड़ियों को आग के हवाले करने के साथ ही मीडिया व पुलिस की गाड़ियां भी आग के हवाले कर दी गई। इस बवाल में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। राजधानी लखनऊ में भी ठाकुरगंज इलाके में आगजनी,हजरतगंज इलाके के परिवर्तन चौक पर तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं हुई थीं। इस मामले में सीएम योगी ने साफ़ कर दिया था कि हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई दंगाइयों से ही की जाएगी। 

पूर्व आईजी,कांग्रेस नेता समेत 46 के खिलाफ कुर्की की नोटिस 
लखनऊ जिला प्रशासन ने जिन्हें नोटिस जारी किया गया है उसमें प्रमुख रूप से रिटायर्ड आईजी एसआर दारापुरी, कांग्रेस नेता सदफ जफर, और रिहाई मंच के मोहम्मद शोएब प्रमुख हैं। इन लोगों के साथ ही 46 अन्य लोगों के खिलाफ कुर्की की नोटिस जारी की गई है। इसके अलावा जिला प्रशासन की ओर से 100 से अधिक लोगों को नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति का नोटिस दिया गया है। 

क्षतिपूर्ति राशि न जमा करने पर जाना होगा जेल 
डीएम लखनऊ अभिषेक प्रकाश के मुताबिक पुलिस द्वारा तैयार की गई दंगाइयों की लिस्ट के हिसाब से सभी को नोटिस भेजी गई है। नोटिस भेजकर एक सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा है। जिसके बाद अगर वो खुद को निर्दोष साबित नहीं कर पाते हैं तो उन्हें एक तय राशि का भुगतान सरकार को क्षतिपूर्ति के तौर पर करना होगा। निर्धारित राशि न देने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी,उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है। 

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