यूपी के चित्रकूट स्थित रानीपुर टाइगर रिजर्व भारत के 53वें टाइगर रिजर्व के तौर पर बनकर तैयार हो चुका है। रानीपुर टाइगर रिजर्व के जरिए इको पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही लोगों को रोजगार के भी नए अवसर प्राप्त होंगे।

चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में स्थित रानीपुर टाइगर रिजर्व भारत का 53वां टाइगर रिजर्व बन कर तैयार हो गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट कर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 529.36 वर्ग किमी (कोर एरिया 230.32 वर्ग किमी और बफर एरिया 299.05 वर्ग किमी) में फैला नया टाइगर रिजर्व हमारे बाघ संरक्षण प्रयासों को मजबूत करेगा। जंगल घूमने के शौकीन अब जल्द ही रानीपुर टाइगर रिजर्व में बाघ-तेंदुओं के संग सैर का मजा ले सकेंगे। इस दौरान काले हिरन, गुलदार, जंगली बिल्ली और चौसिंघा को भी यहां पर देख सकेंगे।

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प्रोजेक्ट टाइगर का होगा हिस्सा 
बता दें कि रानीपुर टाइगर रिजर्व के लिए वन विभाग ने 65000 हेक्टेयर क्षेत्रफल का नक्शा तैयार कर शासन को भेजा था। लेकिन सरकार ने इसके लिए 52000 हेक्टेयर क्षेत्रफल को लिया था। रानीपुर टाइगर रिजर्व अधिसूचित होने के बाद भारत सरकार के प्रोजेक्ट टाइगर का हिस्सा हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत के केंद्र सरकार की तरफ से 60 प्रतिशत और योगी सरकार द्वारा 40 प्रतिशत फंड दिया गया। इसके अलावा रानीपुर टाइगर रिजर्व फाउंडेशन के गठन और उसके संचालन के लिए एकमुश्त 50 करोड़ रुपए के कॉर्पस फंड की व्यवस्था की गई थी। 

सुरक्षित हो सकेगा बाघों का पुनर्वास
इस टाइगर रिजर्व के बनने से डूब क्षेत्र में आने के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व से बाघ यहां लाए जाएंगे। जिससे इन बाघों का पुनर्वास सुरक्षित रूप में हो सकेगा। इससे प्रदेश के बाघों की संख्या में भी इजाफा होगा। साथ बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन को भी इससे बढ़ावा मिलेगा। इस क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास पर सरकार खास तौर पर फोकस कर रही है। वहीं स्थानीय जनता को भी रोजगार के हर वर्ष नए अवसर प्राप्त होंगे। बता दें कि प्रदेश में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है। हर चार वर्ष में इनकी गिनती की जाती है।

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