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सुलतानपुर में सुरेश जोशी करेंगे RSS के कार्यालय का लोकार्पण, सांसद मेनका गांधी भी रहेंगी मौजूद

 संघ का यह कार्यालय सुलतानपुर के उस क्षेत्र में स्थापित हुआ है़ जहां 10वीं सदी के करीब अलाउद्दीन खिलजी ने विध्वंश करके खंडहर कर दिया था। ऐसे में इस कार्यालय के जरिए संघ पूर्वी यूपी के अवध क्षेत्र में अपनी जड़ें गहरी करने और पकड़ मजबूत बनाने में जुट गया है। 

Suresh Joshi will inaugurate RSS office in Sultanpur many facilities including lift in office
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Sultanpur, First Published Dec 8, 2021, 10:05 AM IST
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सुलतानपुर: अयोध्या से सटे सुलतानपुर में आज आरएसएस (RSS) कार्यालय का लोकार्पण संघ के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य व निवर्तमान सरकार्यवाह सुरेश जोशी (भैय्या जी जोशी) (Suresh Joshi) करेंगे। इसमें संघ के पदाधिकारियों के साथ सुलतानपुर सांसद मेनका गांधी (Meneka Gandhi) भी शामिल होंगी। बता दें कि संघ का यह कार्यालय सुलतानपुर के उस क्षेत्र में स्थापित हुआ है़ जहां 10वीं सदी के करीब अलाउद्दीन खिलजी ने विध्वंश करके खंडहर कर दिया था। ऐसे में इस कार्यालय के जरिए संघ पूर्वी यूपी के अवध क्षेत्र में अपनी जड़ें गहरी करने और पकड़ मजबूत बनाने में जुट गया है। 

संघ से जुड़े सत्य प्रकाश गुप्ता ने बताया कि आध्यात्मिक नगरी अयोध्या धाम, प्रयागराज संगम, काशी, चित्रकूट, गोरखपुर और राजधानी लखनऊ के बीच स्थित बने संघ का आधुनिक कार्यालय पूर्वांचल की गतिविधियों का केंद्र होगा। संघ की बड़ी और महत्वपूर्ण बैठकें व प्रशिक्षण शीघ्र ही आयोजित होने शुरू हो जायेगे। इस वर्ष 16 फरवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी, प्रान्त प्रचारक रमेश जी की उपस्थिति में जिला संघचालक डॉ. ए.के. सिंह ने सपत्नी भूमि पूजन किया था। साल भर के अन्दर बहुमंजिला इमारत बनकर तैयार हो गई है। संघ के आधुनिक भवन में लिफ्ट की व्यवस्था के साथ लगभग दो दर्जन कमरे, चार सौ लोगों का मीटिंग हाल, कॉन्फ्रेंस रूम व 50 गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था बनाई गई है। 

1857 में खंडहर में तब्दील कर दिया था पुराना सुल्तानपुर

संघ का विभाग कार्यालय 'पुराना सुल्तानपुर कस्बा' नाम से मशहूर उस जगह पर स्थापित होने जा रहा है जिसे मुस्लिम शासक अलाउद्दीन खिलजी ने उजाड़कर नष्ट कर दिया था और यहां के तत्कालीन भर शासक नंदकुंवर की हत्या करने के बाद इस नगर का नाम 'कुशभवनपुर' से सुल्तानपुर कर दिया था। यहीं नहीं 1857 में अंग्रेजों ने बगावत की सजा के तौर पर इसी 'पुराना सुल्तानपुर' को पुनः उजाड़ कर खंडहर में तब्दील कर दिया था। अब संघ यहां पुनर्जागरण करने की कोशिश में है।

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