श्री राम अस्पताल के मुख्य चिकित्सक अनिल कुमार भी मानते हैं कि लॉकडाउन में बंदर सबसे ज्यादा हिंसक हो गए हैं। प्रतिदिन 40 से 50 के करीब बंदर के काटने से घायल मरीज इलाज व इंजेक्शन लगवाने आ रहे हैं। बंदरों के हिंसक होने के का सबसे बड़ा कारण भोजन का नहीं मिलना है। हजारों की संख्या में बंदर सड़कों, मंदिरों व घरों की छत पर रहकर भोजन की तलाश कर रहे हैं। भोजन नहीं मिलने से जो लोग किसी समान के साथ निकलते हैं, वे उनके ऊपर हमलावर हो जाते हैं। 

अयोध्या (Uttar Pradesh)। अयोध्या में हजारों की संख्या में बंदर रहते हैं, जो वहां आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दी गई खाने की वस्तुओं पर निर्भर रहते हैं। लेकिन, लॉकडाउन में पाबंदियों की वजह से श्रद्धालु अयोध्या से नदारद हैं। होटल व रेस्टोरेंट भी बंद हैं। इस वजह से उन्हें भोजन के रूप में ऐसा कोई सामान नहीं मिल रहा है जिसे वो खा सके। इसके चलते अब बंदर कुछ ज्यादा ही हिंसक हो रहे हैं। वह लोगों को हमला कर रहे हैं।

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संकट की घड़ी में आगे आ रहे संत
बंदरों का धार्मिक महत्व भी है। बंदरों को हनुमान जी की सेना मानी जाती है। जिनपर भगवान श्री राम की विशेष कृपा रहती है। लेकिन, लाकडाउन के कारण बंदरों की परेशानियां बढ़ गईं हैं। हालांकि इस संकट की घड़ी में कुछ समाजसेवी व संत सामने भी आए हैं, जो बंदरों को भोजन उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। 

अस्पताल में बढ़े मरीज
श्री राम अस्पताल के मुख्य चिकित्सक अनिल कुमार भी मानते हैं कि लॉकडाउन में बंदर सबसे ज्यादा हिंसक हो गए हैं। प्रतिदिन 40 से 50 के करीब बंदर के काटने से घायल मरीज इलाज व इंजेक्शन लगवाने आ रहे हैं।

डाक्टर बता रहे ये वजह
डॉक्टर अनिल कुमार के मुताबिक बंदरों के हिंसक होने के का सबसे बड़ा कारण भोजन का नहीं मिलना है। हजारों की संख्या में बंदर सड़कों, मंदिरों व घरों की छत पर रहकर भोजन की तलाश कर रहे हैं। भोजन नहीं मिलने से जो लोग किसी समान के साथ निकलते हैं, वे उनके ऊपर हमलावर हो जाते हैं।