जांच में यह बात सामने आई कि शराब पीने के बाद वह खूंखार हो जाता था। पहले भी कई बार मां, पत्नी व बच्चों को पीटता रहा है। पिछले साल अप्रैल में पति की इन्हीं हरकतों से तंग आकर पत्नी अपने चार बच्चों को लेकर मायके चली गई थी। 

कानपुर ( Uttar Pradesh) । सजेती क्षेत्र के कुआंखेड़ा गांव में 27 जनवरी को रामकिशन ने मां मुन्नी देवी (70) की धारदार हथियार साबड़ से वार कर हत्या कर दी थी। इस मामले की जांच में जुटी पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। जिसके रिपोर्ट के मुताबिक हो सकता है कि उसने मां का गला भी दबाया हो, लेकिन गर्दन काटे जाने से इसका पता लगाना मुश्किल है। हालांकि गर्दन काटने में उसने 25 से 30 वार किए होंगे। दूसरी ओर पड़ोसियों ने पुलिस को बताया वारदात को अंजाम देने के बाद ट्राली पर चढ़कर धमकी दे रहा था कि वह दुनिया का सबसे क्रूर आदमी है, कोई उसके जैसा नहीं है। अपनी मां को मार डाला तो कोई और भी नहीं बचेगा। 

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

पीएम रिपोर्ट में यह जताई गई संभावना
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मृतक मुन्नी देवी के सिर पर चोट है। अनुमान है कि आरोपी ने साबड़ से पहला वार सिर पर ही किया होगा। तेज वार से वह बेहोश हो गई होंगी, इसीलिए उनकी चीख तक नहीं निकली। बेहोशी हालत में राम किशन ने साबड़ से गर्दन काट डाली। 

हाथ में मां का कटा सिर लेकर आया था बाहर
पड़ोसियों ने बताया कि रामकिशन जब कटा सिर लेकर बाहर आया तब हत्या की जानकारी हुई। उन लोगों ने उसे दौड़ाया तो वह ट्राली पर चढ़ गया था और धमकी दी कि वह दुनिया का सबसे क्रूर आदमी है, कोई उसके जैसा नहीं है। अपनी मां को मार डाला तो कोई और भी नहीं बचेगा। यह उसका रूप देखकर वहां मौजूद लोग डर गए थे। हालांकि बाद में जब अधिक लोग एकत्र हुए तो हिम्मत करके उसे पकड़ा गया।

नशे में खूंखार हो जाता था राम किशन
जांच में यह बात सामने आई कि शराब पीने के बाद राम किशन खूंखार हो जाता था। पहले भी कई बार मां, पत्नी व बच्चों को पीटता रहा है। पिछले साल अप्रैल में पति की इन्हीं हरकतों से तंग आकर माया अपने चार बच्चों को लेकर मायके चली गई थी।

मां को मानता था पत्नी के जाने का जिम्मेदार
रामकिशन पत्नी माया के मायके जाने के लिए मां को जिम्मेदार मानता था। 28 जनवरी को वह ससुराल से लौटा था, तब से झगड़ा बढ़ गया था। अगले दिन ही उसने मां की हत्या कर दी थी। सास की मौत और पति की गिरफ्तारी के बाद भी माया गांव नहीं पहुंची।