बिजली विभाग के भी कारनामे अजीबोगरीब होते हैं। यूपी के सहारनपुर में लॉकडाउन में एक किसान अपना दो महीने का घरेलू बिजली का बिल नहीं जमा कर पाया था। बुधवार दोपहर वह बिल जमा करने पहुंचा तो बकाया देखकर उसके होश उड़ गए। कैश काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने किसान को उसके दो महीने का बकाया घरेलू बिजली बिल 10 लाख रुपए भेज पकड़ा दिया

सहारनपुर(Uttar Pradesh).  बिजली विभाग के भी कारनामे अजीबोगरीब होते हैं। यूपी के सहारनपुर में लॉकडाउन में एक किसान अपना दो महीने का घरेलू बिजली का बिल नहीं जमा कर पाया था। बुधवार दोपहर वह बिल जमा करने पहुंचा तो बकाया देखकर उसके होश उड़ गए। कैश काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने किसान को उसके दो महीने का बकाया घरेलू बिजली बिल 10 लाख रुपए भेज पकड़ा दिया। बिल का बकाया अमाउंट देखते ही किसान अवाक रहा गया। अब वह अधिकारियों के पास इस बिल को लेकर चक्कर लगा रहा है। बिजली विभाग के अधिकारियों से कोई मदद ने मिलने के बाद उसने डीएम से मामले की गुहार लगाई है।

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सहारनपुर जिले के गांव ब्राह्मण माजरा निवासी किसान धर्म सिंह पुत्र लाल सिंह के मुताबिक उसके भाई अतर सिंह के नाम से घर का बिजली का कनेक्शन है। वह लगातार हर महीने बिजली का बिल भरते आ रहे हैं। मार्च में उन्होंने 14 हजार बिजली का बिल जमा किया था। उन्होंने बताया कि उनका घरेलू कनेक्शन 2 किलो वाट का है। इस हिसाब से उनका 2 महीने का बिल लगभग 1500 रुपए आना चाहिए था। लॉकडाउन के कारण वह 2 महीने अप्रैल और मई का बिल जमा नहीं करा पाए थे। किसान ने बताया कि 1 सप्ताह पहले जब वह बिजली का बिल जमा करने अंबेहटा विद्युत् उपकेंद्र पर गए तो वहां कर्मचारी ने कंप्यूटर से 10 लाख रुपए से भी अधिक का बिल निकालकर उनके पकड़ा दिया।

बिजली विभाग के अधिकारियों से नही मिली कोई मदद 
10 लाख से ज्यादा का बिल देखकर किसान के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। किसान ने जब बिजली विभाग के अधिकारियों से इस बारे में शिकायत की तो उन्होंने पहले सारे पुराने बिल मंगवाए, लेकिन जब किसान सारे बिल लेकर पहुंचा तो अधिकारियों ने उसकी कोई मदद नहीं की। करीब एक सप्ताह तक बिजली विभाग के चक्कर काटने के बाद भी जब समस्या नहीं सुलझी तो किसान ने जिलाधिकारी अखिलेश सिंह को शिकायत करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

डीएम ने कहा मामले की होगी जांच 
इस मामले में सहारनपुर के डीएम अखिलेश सिंह ने बताया कि किसान की शिकायत मिली है । मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। ये कोई फीडिंग मिस्टेक भी हो सकती है। मामले की जांच करवाकर पीड़ित की हर संभव मदद की जाएगी।