यूपी के पूर्व और सबसे चर्चित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर भी अब राजनीति में एंट्री करने वाले हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वह सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में छह महीने बाद यानि साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। देश के सबसे बड़े राज्य में सत्ता पर काबिज होने के लिए सभी पार्टियों ने अभी से जोर लगाना शुरू कर दिया है। इसी बीच बड़ी खबर सामने आई है कि यूपी के पूर्व और सबसे चर्चित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर भी अब राजनीति में एंट्री करने वाले हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वह सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

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पूर्व IPS ने ट्वीट कर बताई ये वजह
दरअसल, पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ने ट्वीट कर कहा कि उनके कुछ साथी सीएम योगी के खिलाफ चुनाव लड़ने का बोल रहे हैं। इसलिए सभी बातों पर गंभीरता से विचार कर मैंने निर्णय लिया है कि वे जहां से भी योगी आदित्यनाथ आगामी विधान सभा चुनाव लड़ेंगे, मैं निश्चित रूप से उनके विरुद्ध चुनाव लडूंगा

खुद कहा था कि मुझे वोट कम मिलेंगे...
बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को ट्वीट कर अमिताभ ठाकुर ने कहा था कि योगीजी के खिलाफ चुनाव लड़ने का आईडिया बुरा नहीं है, वैसे मैं भी जानता हूँ कि मुझे वोट बहुत ही कम मिलेंगे, नाममात्र के, क्योंकि मुझ में नेताओं वाले गुण नहीं हैं, पर इतना जरुर है कि उस चुनाव में योगीजी से आचार संहिता का पूर्ण पालन जरुर करवा दूंगा।

इस वजह से गृह मंत्रालय उन्हें कर दिया था सेवानिवृत्त 
अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। लेकिन यूपी उनकी कर्मभूमि रही है, वह उत्तर प्रदेश में कई जिलों को बतौर एसपी तैनात रह चुके हैं। उनकी छवि तेजतरार्र अफसरों में होती थी। इतना ही नहीं वह नेशनल आरटीआई फोरम के संस्थापक भी रहे चुके हैं। अमिताभ ठाकुर को 23 मार्च 2021 को सेवानिवृत्त कर दिया गया था। उनकी सेवानिवृत्ति के संबंध में गृह मंत्रालय से जारी किए गए आदेश में कहा गया था कि वह अपनी सेवाएं पूरी करने के लिए फिट नहीं है। इसलिए लोकहित में उन्हें सेवानिवृत्त किया जाता है।

विवादों से रहा है उनका नाता
बता दें कि आमिताभ ठाकुर का विवादों से नाता रहा है, उन्होंने 6 साल पहले आरोप लगाया था कि मुलायाम सिंह ने उन्हें फोन पर धमकी दी है। इतना ही नहीं उन्होंने धमकी वाला ऑडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर भी किया था। इसके बाद मुलायम सिंह ने कबूल किया था कि उन्होंने फोन किया था लेकिन धमकी नहीं दी। इतना ही नहीं और भी ऐसे कई मामले हैं जिनकी वजह से वह चर्चा में बने रहे।