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गरीबी के कारण छोड़नी पड़ी थी डॉक्टरी की पढ़ाई, अब गरीब बच्चों को मुफ्त में देते हैं कोचिंग

दुनिया में ऐसे काफी कम लोग होते हैं जो दूसरों के लिए निस्वार्थ भाव से कुछ करते हैं। लेकिन झारखंड के रहने वाले अजय बहादुर सिंह ने गरीब बच्चों के सपने को साकार करने के लिए जो किया, वो उन्हें फेमस बना रहा है। 

Ajay bahadur singh helps poor becoming doctor providing free medical coaching kph
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Jharkhand, First Published Dec 9, 2019, 9:55 AM IST
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झारखंड: आपने मैथ्स के टीचर आनंद कुमार के बारे में तो सुना होगा। सुपर 30 के जरिये वो गरीब बच्चों को आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए तैयार करते हैं। इसके लिए बच्चों से कोई शुल्क भी नहीं लिया जाता है। आनंद कुमार की जिंदगी पर बनी फिल्म के बाद शायद ही भारत में ऐसा कोई होगा, जिसे ऊके बारे में नहीं पता होगा। लेकिन हम आज बात कर रहे हैं झारखंड के अजय बहादुर सिंह की। गरीबी के कारण जब अजय को मेडिकल की पढ़ाई छोड़नी पड़ी, तो उन्होंने गरीब बच्चों को कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी करवाने के लिए कोचिंग सेंटर खोल दिया।  आज वो कई गरीब बच्चों को मुफ्त में मेडिकल की तैयारी करवाते हैं।  

पिता की बीमारी के बाद छूटी पढ़ाई 
अजय बहादुर जब 18 साल के थे, तब से मेडिकल की तैयारी कर रहे थे। उस समय उनके पिता झारखंड सरकार (उस समय बिहार ) में इंजीनियर की पद पर कार्यरत थे। अचानक उनके पिता की तबियत काफी खराब हो गई। किडनी ट्रांसप्लांट से ही जान बचाई जा सकती थी। पिता के इलाज के लिए परिवार को अपनी संपत्ति बेचनी पड़ी। इसके बाद पिता का ध्यान रखने और घर चलाने के लिए अजय ने पढ़ाई छोड़ दी और ट्यूशन पढ़ाने लगे।  

चाय तक पड़ी बेचनी 
पिता का चन्नई में किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद अजय ट्यूशन पढ़ाने लगे। लेकिन इससे घर चलाना मुश्किल पड़ रहा था। इसलिए उन्होंने देवघर में चाय और शरबत का स्टॉल शुरू किया। इस दौरान उन्होंने ग्रेजुएशन भी किया। और साथ ही सोडा बनाने की मशीन भी बेची। 

 खोला कोचिंग सेंटर 
अजय की पढ़ाने की काबिलियत से कई स्टूडेंट्स प्रभावित थे। बच्चों की बढ़ती संख्या देखते हुए उन्होंने 1996 में पटना में करतार कोचिंग सेंटर शुरू किया। इसमें कई कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी करवाई जाती थी। इसके 10 साल बाद उन्होंने एक प्राइवेट कॉलेज खोला। इसके बाद अजय नहीं रुके। उन्होंने गरीब बच्चों को कम फीस पर पढ़ाने का निश्चय किया। इसके लिए उन्होंने एटम 50 की शुरुआत की। 

सुपर 30 जैसा है एटम 50 
एटम 50 में अजय 50 गरीब बच्चों को मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग देते हैं। इसमें क्लास 10th के बाद से ही बच्चों को शामिल किया जाता है। अजय उनका सारा खर्च उठाते हैं। उनके कोचिंग के ज्यादातर बच्चे मेडिकल क्लियर करते हैं। अजय ने जिंदगी फाउंडेशन भी बनाया है। जिसमें बेसहारा बच्चों को रखा और पढ़ाया जाता है। 

स्टूडेंट्स के लिए बने कड़े नियम 
एटम 50 में शामिल बच्चों को कई नियम मानने पड़ते हैं, जैसे...

-किसी भी विद्यार्थी के पास मोबाइल फोन नहीं होता।

-अजय कभी-कभी उन्हें मूवी या कहीं घुमाने ले जाते हैं।

-वे बच्चों के साथ सभी त्यौहार मनाते हैं।

-माता-पिता जब चाहें आकर अपने बच्चों से मिल सकते हैं।
 

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