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इस मासूम बच्चे को नहीं छू सकते हैं मम्मी-पापा, दूर से देख रोती रहती है मां

अमेरिका में रहने वाले विक्टर नावा और उनकी पत्नी एड्रियाना अपने पांच महीने के बच्चे को छू नहीं सकते। एड्रियाना अपने बच्चे को दूर से देखकर सिर्फ रोती रहती हैं। इसके पीछे की वजह जानकर अआप भी इमोशनल हो जाएंगे।

Parents avoid touching kid suffering from rare skin disease
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America City, First Published Oct 2, 2019, 2:45 PM IST
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अमेरिका: मां-बाप के लिए उनके बच्चे जान से भी प्यारे होते हैं। नवजात को तो मां अपने सीने से लगाकर रखती हैं। लेकिन उस मां-बाप के बारे में सोचिये, जो अपने बच्चे को छू भी नहीं सकते। बच्चा उनके बिल्कुल पास ही पड़ा है और उन्हें देखकर मुस्कुरा रहा है, लेकिन पेरेंट्स उसे टच नहीं कर सकते। ऐसा ही कुछ होता है कैलिफोर्निया में रहने वाले विक्टर और एड्रियाना के साथ। 

छूते ही रोने लगता है बच्चा 
14 मई 2019 को कैलिफोर्निया के सेंट जोसफ हॉस्पिटल में इस बच्चे का जन्म हुआ था। दोनों ने बड़े प्यार से उसका नाम एड्रीन रखा था। लेकिन जन्म के कुछ समय बाद जैसे ही एड्रियाना ने बच्चे को गोद में लिया, वो कांपने लगा और काफी जोर से रोने लगा। घबराए पेरेंट्स ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया, जिन्होंने चौकाने वाली बात दोनों को बताई। 

लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है बच्चा 
डॉक्टर्स ने तुरंत बच्चे की जांच की। इसमें उन्हें पता चला कि एड्रिन को एपीडरमोलिसिस बुल्लोसा नाम की स्किन डिजीज है। ये एक रेयर डिजीज है जिसका इलाज नहीं हो सकता। साथ ही ये बीमारी जानलेवा भी है। इस बीमारी में शरीर पर अपने आप घाव हो जाते हैं और स्किन उतरने लगती है। साथ ही इससे पीड़ित इंसान की बॉडी में काफी जलन भी होती है। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे एक साल के अंदर ही मर जाते हैं।  

पिता ने बताया दर्द 
एंड्रिन के पिता ने बताया कि उसके पैदा होने के बाद जब पहली बार दोनों ने उसे देखा तो हैरान रह गए थे। दरअसल, एंड्रिन की स्किन काफी पतली थी। साथ ही वो छूते ही उतरने लगती थी। ये देखकर दोनों ही सदमे में चले गए थे। अब पांच महीने का हो चुका एंड्रिन दूर से  ही अपने पेरेंट्स को देखकर मुस्कुराता है। लेकिन दोनों उसे हाथ नहीं लगाते। अगर वो ऐसा करेंगे तो एंड्रिन का दर्द बढ़ जाएगा।  

इलाज में हर महीने लाखों का खर्च 
विक्टर और एंड्रियाना अपने बच्चे के इलाज के लिए पैसे इक्कठा कर रहे हैं। एंड्रिन के इलाज में हर महीने दस से ग्यारह लाख का खर्च आता है। इसमें एंड्रिन को एंटीबायोटिक्स दवाएं दी जाती हैं। चूंकि, पेरेंट्स के पास इतने पैसे नहीं हैं, इसलिए दोनों ने एंड्रिन के लिए क्राउड फंडिंग शुरू की है।  

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