ब्राज़ील में रहने वाली 52 साल की डेनिस वीकेन्टीन की जिंदगी स्किन कैंसर के कारण बर्बाद हो गई थी। लेकिन अब डॉक्टर्स ने उसके चेहरे को दुबारा रिक्रिएट कर उसकी जिंदगी बदल दी है। डेनिस के लिए विज्ञान वाकई वरदान बनकर सामने आया। 

ब्राजील: आज के समय में विज्ञान कई चमत्कारों के साथ सामने आता है। ऐसी कई चीजें विज्ञान के कारण मुमकिन हो चुकी है, जो पहले पॉसिबल नहीं थी। ऐसा ही ककुछ हुआ ब्राजील के साओ पोलो की रहने वाली 53 वर्षीया डेनिस के साथ। स्किन कैंसर के कारण डेनिस का चेहरा बुरी तरह बिगड़ गया था। लेकिन पाउलिस्टा विश्वविद्यालय के रिसर्चर्स के कारण आज वो दुबारा नॉर्मल जिंदगी जीने की तरफ कदम बढ़ा चुकी हैं। 

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कैंसर ने बर्बाद किया चेहरा 
23 साल की उम्र में पहली बार डेनिस को चेहरे का ट्यूमर हुआ। दो बार निकाले जाने के बावजूद 20 साल बाद यह ट्यूमर घातक रूप में फिर से डेनिस के चेहरे पर आ गया। धीरे धीरे इस बीमारी ने उनकी शादी, आत्मसम्मान के साथ साथ उनके चेहरे के बांईं ओर का हिस्सा भी छीन लिया। डेनिस कहती हैं, "जब मैं मेट्रो या ट्रेन में होती हूं तो कोशिश करती हूं कि लोगों की घूरती निगाहों को ना देखूं।" वह चेहरे के एक तरफ जबड़ा ना होने की वजह से ना खाना ठीक से खा पाती हैं ना बोल पाती हैं। उनकी बेटी जैसिका उनकी बातों को लोगों तक पहुंचाती हैं। 

मसीहा बने डॉक्टर्स 
पाउलिस्टा विश्वविद्यालय के शोधकर्ता सिलिकॉन प्रोस्थेसिस यानी कृत्रिम अंग बनाने के लिए स्मार्टफोन और 3डी प्रिंटिंग के जरिए पहले डिजिटल फेशियल इंप्रेशन बना रहे हैं। इस तकनीक ने इलाज की लागत घटा दी है, उत्पादन में लगने वाला समय आधा हो गया है। इस तकनीक के मुख्य शोधकर्ता रॉड्रिगो सलाजार कहते हैं, "पहले इसी ऑपरेशन में कई घंटे लगते थे। मरीज के चेहरे पर इस्तेमाल होने वाली सामग्री हाथों से बनाई जाती थी। आज मोबाइल की तस्वीर से तीन आयामी मॉडल तैयार किया जा सकता है। " इस तकनीक के जरिए अब तक 50 लोगों का इलाज किया जा चुका है। डेनिस भी इन्हीं लोगों में से एक हैं। 

लंबा चला इलाज 
डेनिस में परिवर्तन की प्रक्रिया 2018 से शुरू हुई थी। डेनिस के लिए बनाए कृत्रिम अंग को चेहरे पर बनाए रखने के लिए आंखों में टाइटेनियम रॉड लगाई। एक साल तक डेनिस के चेहरे के ऊतकों का निर्माण करने के लिए कई सर्जरी हुई। स्मार्टफोन का उपयोग करते हुए सलाजार ने अलग अलग कोणों से उनके चेहरे की 15 तस्वीरें लीं, जिनका उपयोग तीन आयामी डिजिटल मॉडल बनाने के लिए किया गया। मॉडल का उपयोग करते हुए ग्राफिक डिजाइनर ने डेनिस के चेहरे की एक स्वस्थ्य मिरर तस्वीर बनाई। इसके बाद 3डी तकनीक के माध्यम से प्रोटोटाइप प्रोस्थेसिस बनाया गया जिसका प्रयोग सिलिकॉन, रेसिन और सिंथेटिक फाइबर के प्रोस्थेसिस बनाने में किया गया। कृत्रिम अंग बिल्कुल असली लगे इसके लिए सालाजार ने डैनिस की असली त्वचा और नीली-हरी आंखों के रंग से मिलान किया। कृत्रिम अंग बनाने की प्रक्रिया में 12 घंटे का समय लगा। यह पहले लगने वाले समय का आधा था। 

इस तरह बदली जिंदगी 
डेनिस के लिए सफर अभी लंबा है। उन्हें अपने जबड़े और ऊपर के होंठों के लिए और भी सर्जरी करानी पड़ेगी। लेकिन अभी वो बहुत खुश हैं। कृत्रिम अंग के साथ घर पर पहली रात बिताने के बाद उन्होंने कहा, "मैंने केवल इसे साफ करने के लिए उतारा. मैं पहनकर ही सोयी।" वहीं पहले जहां डेनिस घर से बाहर नहीं जाती थी, अपना ही चेहरा देखने से डर्टी थी, आज आराम से बाहर जाती हैं।