मुहर्रम मुसलमानों में शिया समुदाय के लिए मातम का मौका होता है। इस दौरान शिया समुदाय के लोग पैगंबर के लिए मातम में डूबे रहते हैं।  

नई दिल्ली: सड़कों पर मुहर्रम के दिन जुलूस निकालकर शिया समुदाय दुख मनाते हैं। वो खुद को कोड़े मारते हैं और उस तकलीफ से पैगंबर से माफ़ी मांगते हैं। आपको बता दें कि मुहर्रम में मुस्लिम समुदाय को कई चीजें करने की मनाही होती है। कहा जाता है कि मातम मनाने के लिए खुद को तकलीफ देने के अलावा रूटीन में भी बदलाव करना चाहिए। तभी आपकी तकलीफ पैगंबर महसूस करेंगे। हम आपको बताने जा रहे हैं, उन चीजों के बारे में, जो मुहर्रम में करना मना है।

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निकाह है वर्जित 
मुहर्रम का महीना मातम का होता है। इस दौरान खुशी की किसी भी चीज को करना मना होता है। साथ ही इसे अशुभ भी माना जाता है। वहीं निकाह ख़ुशी का मौका है जबकि मुहर्रम मातम का। ऐसे में मुहर्रम के महीने में मुसलमान निकाह नहीं करते। निकाह जिंदगी का अहम मौका होता है। ऐसे में इसे अशुभ समय, यानी मुहर्रम के महीने में करना भी अशुभ ही माना जाता है। 

रंगीन कपड़े ना पहने 
मुहर्रम का महीना मातम का है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय इस दौरान किसी भी तरह की खुशियां नहीं मनाते। साथ ही इस दौरान वो रंगीन और खूबसूरत कपड़े भी नहीं पहनते। ऐसा कहा जाता है कि इंसान ख़ुशी के मौके पर ही अच्छे कपड़े पहनता है। इसलिए मुहर्रम के महीने में ये लोग कलए कपड़े पहनते हैं। कपड़ों का सिलेक्शन इस महीने में बहुत अहम होता है। 

सेलिब्रेशन है मना 
मुहर्रम के महीने में मुस्लिम समुदाय किसी भी तरह की खुशियां नहीं मनाते। इस दौरान ना तो कोई फैमिली फंक्शन होता है, ना ही वो कुछ सेलेब्रेट करने बाहर जाते हैं। इस समय उनका सबसे ज्यादा समय इबादत करने में गुजरता है। यहां तक की इस समय जन्मदिन पड़ने पर उसे भी नहीं मनाया जाता है।

भड़काऊ बातें करना है मना 
मातम के इस महीने में भड़काऊ बताएं नहीं करनी चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि इस समय ऐसी कोई बात ना की जाए, जिससे किसी को गुस्सा आए। साथ ही इस दौरान मन को शांत रखना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि जबतक आपका मन शांत नहीं है, आप मातम नहीं मना सकते हैं।

गाने सुनना है मना 
इस दौरान मुस्लिम समुदाय गाने सुनने से लेकर नाच-गाना भी नहीं करते। ऐसी कोई भी चीज जो आपके दिल को ख़ुशी पहुंचाए, वो मुहर्रम के महीने में वर्जित रहता है।