18 साल की उम्र में खुद को बचाने के लिए हमलावर की जीभ काटने पर एक महिला को 10 महीने की जेल हुई थी। आखिरकार, साठ साल बाद उन्हें न्याय मिला है।

लात्कार करने की कोशिश करने वाले व्यक्ति की जीभ काटने के जुर्म में सजा पा चुकी दक्षिण कोरियाई महिला को छह दशक बाद न्याय मिला है। ७८ वर्षीय महिला ने गलत तरीके से सजा दिए जाने का आरोप लगाते हुए दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जैसा कि साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट किया है। हाल ही में आए कोर्ट के फैसले में उन्हें निर्दोष करार दिया गया और माना गया कि उन्हें गलत तरीके से सजा दी गई थी।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब 78 साल की इस महिला पर 18 साल की उम्र में उनके पड़ोसी ने हमला किया था। हमलावर का नाम नोह था। खुद को बचाने के लिए उन्होंने हमलावर की जीभ काट दी थी। उन्होंने दलील दी थी कि उन्होंने आत्मरक्षा में ऐसा किया था, लेकिन उस समय की अदालत ने उनकी बात नहीं मानी। दूसरे व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल करने के आरोप में उन्हें दोषी ठहराया गया था। इसके बाद उन्हें 10 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। जबकि हमलावर को केवल छह महीने की जेल हुई थी!

2020 में द कोरिया हेराल्ड को दिए एक इंटरव्यू में, पीड़िता ने बताया कि उनके केस की पैरवी करने वाले वकील ने उन पर हमलावर से शादी करने का दबाव डाला था। उन्होंने यह भी बताया कि केस को रफा-दफा करने के लिए उनके परिवार को अपनी सारी जमा पूंजी खर्च करनी पड़ी। इसके बावजूद हमलावर उनके परिवार को परेशान करता रहा। आखिरकार, अपने पढ़ाई के दौरान हुए अन्याय के बारे में जागरूक होने के बाद, उन्होंने यौन उत्पीड़न पीड़ितों के साथ काम करने वाले एक स्वयंसेवी समूह की मदद से अपने केस की फिर से जांच कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी कोशिश कामयाब रही और 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने बुसान हाईकोर्ट को उनके केस की दोबारा सुनवाई करने का आदेश दिया।

केस की दोबारा सुनवाई करने वाले बुसान हाईकोर्ट ने माना कि पीड़िता के साथ घोर अन्याय हुआ था। कोरिया हेराल्ड के 2023 के एक लेख में बताया गया है कि 1960 और 1970 के दशक में अदालतें अक्सर बलात्कार पीड़िताओं को उनके बलात्कारियों से शादी करने के लिए मजबूर करती थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महिला को भी उस समय इसी तरह के घिनौने कोर्ट के दखल का शिकार होना पड़ा था।