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CPEC Project: रिपोर्ट में खुलासा- पाकिस्तान में बढ़ रहा आतंकवाद, चीन की सीपीईसी परियोजना पर मंडराया संकट

 पाकिस्ताान में चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिसके चलते चीन इमरान खान सरकार से नाराज है, जानिए क्या है पूरा मामला
 

China ambitious CPEC falls into Pakistan's crosshairs of state-sponsored terrorism, domestic unrest says Report
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Islamabad, First Published Jan 16, 2022, 9:42 AM IST

इस्लामाबाद :  चीन की महात्वाकांक्षी परियोजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिसके चलते चीन पाकिस्तान से खफा है, दरअसल, पाकिस्तान की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, देश में बढ़ते आतंकी हमलों के चलते परियोजना की गति धीमी हो गई है, इस बात का खुलासा एक रिपोर्ट में हुआ है। 

पाक सरकार हर बार हुई असफल
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस परियोजना  को लेकर चीन बार-बार इमरान सरकार के सामने अपनी निराशा व्यक्त कर रहा है, क्योंकि पाक सरकार परियोजना और इसमें शामिल लोगों को सुरक्षा प्रदान करने में हर बार असफल साबित हुई है। 

उत्तरी छोर पर चीन का संकट बढ़ा
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार को बलूचिस्तान, ग्वादर और अन्य क्षेत्रों में लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा रहा है, यहां के लोगों का इमरान खान सरकार पर आरोप है कि उन्हें सरकार बुनियादी सुविधाओं और अधिकारों से वंचित कर दिया है। सीपीईसी के उत्तरी छोर पर चीन का संकट बढ़ गया है, जहां उसने पहले से ही बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भारी निवेश किया है। तालिबान के अफगानिस्तान पर फिर से कब्जा करने के बाद से तनाव बढ़ गया है, जिससे आतंकी समूहों से खतरों की संभावना बढ़ गई है। 

टीटीपी से समझौता करने की कोशिश में लगी पाक सरकार
जियोपॉलिटिका की शनिवार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां अफगान सरकार इस्लामिक स्टेट-खोरासन (आईएस-के) से लड़ रही हैं, वहीं इमरान खान सरकार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ शांति समझौता करने की पूरी कोशिश कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादी समूहों का खतरनाक मिश्रण एक ही समय में मिलीभगत और क्रॉस-उद्देश्य दोनों में काम कर रहा है, जिससे चीन की CPEC परियोजना पर संकट मंडरा रहे हैं। 

ग्वादर में हो रहा पाक सरकार का विरोध
इससे पहले दिसंबर में, एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह में CPEC परियोजनाओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ था। इस मसले पर एक यूरोपीय थिंक टैंक ने चिंता व्यक्त की थी।  जमात-ए-इस्लामी (JI) के एक मौलवी मौलाना हेदयातुर रहमान ने हाल ही में ग्वादर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। वहीं बलूचिस्तान की बात करें तो वहां से हजारों लोग गायब हैं( खुफिया एजेंसियों की हिरासत में) या बलूचिस्तान में मारे गए हैं, क्योंकि वे अपने अधिकार के लिए आवाज उठाते हैं और पाक सरकार की नीतियों का जमकर विरोध करते हैं, पाक सरकार यहां के लोगों की लगातार उपेक्षा करती है।  गौरतलब है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थित लगातार बिगड़ती जा रही है. इसके लिए विपक्ष की पार्टियां पाक सरकार पर हमलावर  हैं. 

क्या है सीपीईसी परिजोयना
सीपीईसी चीन की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशिया के तटीय देशों में देश के व्यापार मार्गों को नवीनीकृत करना है। 2015 में, चीन ने CPEC परियोजना का एलान किया था, जिसकी लागत 60 अरब डॉलर से अधिक बताई गई है। सीपीईसी के साथ, बीजिंग का लक्ष्य अमेरिका और भारत के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान और मध्य और दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव का विस्तार करना है। सीपीईसी पाकिस्तान के दक्षिणी ग्वादर बंदरगाह (कराची से 626 किलोमीटर पश्चिम में) को अरब सागर पर चीन के पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र से जोड़ेगा। इसमें चीन और मध्य पूर्व के बीच संपर्क में सुधार के लिए सड़क, रेल और तेल पाइपलाइन लिंक बनाने की योजना भी शामिल है।

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