वॉशिंगटन. खाड़ी देशों के साथ इजरायल के रिश्तों में लगातार सुधार आ रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को इजरायल से यूएई और बहरीन के रिश्तों में ऐतिहासिक मोड़ की शुरुआत हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंम्प की अध्यक्षता में व्हाइट हाउस में यूएई और बहरीन ने इजरायल के साथ ऐतिहासिक 'अब्राहम' समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत खाड़ी के दोनों देशों ने इजरायल के साथ रिश्तों को पूरी तरह सामान्य करते हुए मान्यता दे दी है। 

राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस समझौते को 'नए मिडिल ईस्ट का आगाज' करार दिया। उन्होंने उम्मीद जताई, इससे पश्चिम एशिया में नई व्यवस्था विकसित होगी। दरअसल, ट्रम्प अमेरिकी चुनाव से पहले अपनी छवि शांति लाने वाले एक हीरो के तौर पर पेश करना चाहते हैं। 

अब तक चार देशों ने दी इजरायल को मान्यता
खाड़ी देश दशकों से इजरायल का बहिष्कार करते रहे हैं। इन देशों का कहना है कि जब तक फिलिस्तीन विवाद हल नहीं हो जाता, तब तक वे इजरायल के साथ रिश्ता नहीं रखेंगे। सिर्फ मिस्र और जॉर्डन ने 1978 और 1994 में इजरायल को मान्यता दी थी। लेकिन अब यूएई और बहरीन तीसरे, चौथे देश बन गए हैं, जिन्होंने इजरायल को मान्यता दी है। 

फिलिस्तीनियों ने बताया विश्वासघात
इस मौके पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के अलावा बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्ला आतिफ, यूएई के विदेश मंत्री और क्राउन प्रिंस के भाई शेख अब्दुल्लाह बिन जायेद अल नाहयान भी मौजूद रहे। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, यह ऐतिहासिक दिन है। यह शांति की नई सुबह का आगाज है। वहीं, बिन जायेद अल नाहयान ने कहा, इस समझौते से दुनिया में उम्मीद की एक नई किरण जगेगी। जबकि फिलिस्तीन के लोगों ने इस समझौते का विरोध करते हुए इसे विश्वासघात करार दिया।