वॉशिंगटन. दुनिया भर में भारत के खिलाफ कश्मीरी लोगों के मानवाधिकार के हनन की बात करने वाले पाकिस्तान की पोल उसी के मुल्क की एक युवती ने खोल दी। ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट गुलालाई इस्माइल ने अमेरिका से शरण मांग कर खुद पाकिस्तान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुलालाई इस्माइल ने बताया कि पाकिस्तान में किस तरह से महिलाओं पर अत्याचार किया जा रहा है। 32 वर्षीय युवती पाकिस्तान से भागकर अमेरिका पहुंच गई है और उसने अमेरिका से राजनीतिक शरण की मांग की है। युवती ने बताया कि उसे पाकिस्तानी अधिकारियों ने छुपकर जीने के लिए मजबूर कर दिया था। गुलालाई इस्माइल को पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसलिए निशाने पर लिया है क्योंकि उन्होंने देश की सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों को उजागर किया था। उनपर पाकिस्तान ने राजद्रोह का आरोप लगाया गया था।

अगस्त में ही पहुंच गई थी अमेरिका
रिपोर्ट के मुताबिक गुलालाई इस्माइल वर्तमान में अपनी बहन के साथ ब्रूकलिन में रह रही हैं। उन्होंने अभी तक यह नहीं बताया है कि वह पाकिस्तान से कैसे भागकर आईं क्योंकि उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी हवाई अड्डे से उड़ान नहीं भरी है। पाकिस्तान में महीनों तक अज्ञात जगह पर छिपी रहीं इस्माइल अगस्त महीने में ही अमेरिका पहुंच गई थीं। हालांकि वह इस सप्ताह ही सामने आईं। वह ऐसे वक्त में पाकिस्तान के खिलाफ सामने आई हैं, जब वह कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप भारत पर लगा रहा है। भारत ने बताया कि कश्मीर में स्थितियां सामान्य हो रही हैं और पाकिस्तान घाटी में आतंकियों की घुसपैठ कराकर अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है।

पाक खुद ही घिरा आतंकवाद के मसले पर
ग्लोबल कम्यूनिटी ने भारत की इस बात को माना है कि पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद फैला रहा है। ग्लोबल कम्यूनिटी की बात का समर्थन करते हुए ट्रंप सरकार ने कहा है, 'पाकिस्तान के आतंकवादी जो कश्मीर में हिंसा फैला रहे हैं, वे कश्मीरियों और पाकिस्तान के दुश्मन हैं।' कश्मीर पर भारत को घेरने की प्रयास कर रहा पाकिस्तान खुद ही आतंकवाद के मसले पर घिरा हुआ है और अब अपने ही देश के मानवाधिकार कार्यकर्ता को लेकर निशाने पर है।

वरिष्ठ अमेरिकी पत्रकार डेकल्न वॉल्श ने गुलालाई इस्माइल को लेकर ट्वीट किया, 'पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता देश से बाहर भाग रहे हैं। आईएसआई के डर से वे ऐसा कर रहे हैं। यह ऐसा ही है, जैसे उत्तर कोरिया के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को देश छोड़ना पड़ता है।'