UNHRC में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के मुद्दे को उठाया जिसमें उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और कूटनीतिक हार का सामना करना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के ज्यादातर सदस्य देशों ने भी यूरोपीय यूनियन की तरफ से लताड़े जाने के बाद पाकिस्तान का साथ देने से इनकार कर दिया है। 

जिनेवा. UNHRC में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के मुद्दे को उठाया जिसमें उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और कूटनीतिक हार का सामना करना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के ज्यादातर सदस्य देशों ने भी यूरोपीय यूनियन की तरफ से लताड़े जाने के बाद पाकिस्तान का साथ देने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर UNHRC में संकल्प पेश करना चाहता था, लेकिन इसके लिए वह पर्याप्त समर्थन जुटाने में असफल रहा। बता दें कि प्रस्ताव पेश करने के लिए कम से कम 16 देशों के समर्थन की जरूरत थी। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान न्यूनतम समर्थन जुटाने में भी नाकाम रहा।

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यह है नियम
नियम के अनुसार किसी भी देश के प्रस्ताव पर कार्रवाई करने के लिए न्यूनतम समर्थन जरूरी होता है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस्लामाबाद से जिनेवा जाने से पहले कश्मीर पर प्रस्ताव का वादा किया था। UNHRC में इस्लामी सहयोग संगठन के 15 देश हैं। जिसके चलते पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह इसके बाद समर्थन जुटा लेगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका और कश्मीर के मुद्दे पर एक संयुक्त बयान के प्रबंधन के बाद भी इस्लामाबाद वोट नहीं जुटा पाया।

'पाक के समर्थन में 60 देश'
पाकिस्तान ने बयान दिया था कि उसके समर्थन में 60 देश हैं, लेकिन कौन से देश समर्थन में हैं इसकी जानकारी वह नहीं दे पाया था। 47 सदस्यों वाले यूएनएचआरसी में पाकिस्तान के पास तीन विकल्प थे। प्रस्ताव, बहस या तो विशेष सत्र। इस विकल्प से अब प्रस्ताव बाहर हो गया। विशेष सत्र सबसे ज्यादा मजबूत विकल्प हो सकता है, लेकिन उसे भी खारिज किया जाता है। सूत्रों की माने तो, सामान्य सत्र 27 सितंबर तक चलेगा, जिसके बीच में विशेष सत्र का आयोजन नहीं किया जा सकता। वहीं बात करें बहस के विकल्प की तो इसके लिए कम से कम 24 देशों के समर्थन की जरूरत होती है। ये दोनों विकल्प बहुत जरूरी मामले में ही संभव हैं।