कोरोना वायरस से दुनिया के 200 से ज्यादा देश प्रभावित हैं। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, स्पेन, जर्मनी और चीन जैसे शक्तिशाली देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। लेकिन अब कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे 34 गरीब देशों के लिए विनाशकारी साबित होगा। यह चेतावनी इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी (आईआरसी) ने कोरोना को लेकर अपनी रिपोर्ट में दी है। 

न्यूयॉर्क. कोरोना वायरस से दुनिया के 200 से ज्यादा देश प्रभावित हैं। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, स्पेन, जर्मनी और चीन जैसे शक्तिशाली देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। लेकिन अब कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे 34 गरीब देशों के लिए विनाशकारी साबित होगा। यह चेतावनी इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी (आईआरसी) ने कोरोना को लेकर अपनी रिपोर्ट में दी है। 

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ब्रिटेन के पूर्व विदेश सचिव डेविड मिलिबैंड की अध्यक्षता वाली एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना करीब 34 गरीब देशों के लिए मुसीबत साबित होगा। इन देशों में करीब 1 अरब लोग संक्रमित हो सकते हैं। वहीं, 30 लाख लोगों की जान जा सकती है।

लिस्ट में भारत के पड़ोसी देश शामिल
रिपोर्ट में जिन 34 देशों का नाम बताया गया है उनमें भारत का नाम नहीं है। भारत के 3 पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार शामिल हैं। वहीं, इसके अलावा अफगानिस्तान, सीरिया और यमन भी शामिल हैं। 

इन 34 देशों में मच सकती है तबाही
इस रिपोर्ट में पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, बुरुंडी, इराक, जॉर्डन, बुर्किना फासो, कैमरून, मध्य अफ्रीकन रिपब्लिक, चाड, कोलम्बिया, कोट डी आइवर, कांगो, अल सल्वाडोर, इथियोपिया, ग्रीस, केन्या, लेबनान, म्यांमार, नाइजर, नाइजीरिया, युगांडा, वेनेजुएला, यमन सिएरा लियोन, सोमालिया, लाइबेरिया, लीबिया, माली,दक्षिण सूडान, सीरिया, तंजानिया और थाईलैंड का जिक्र गरीब देशों के तौर पर किया गया है। ज्यादातर देश युद्धग्रस्त या शरणार्थियों से प्रभावित हैं। 

50 करोड़ से ज्यादा लोग हो सकते हैं संक्रमित
इस रिपोर्ट को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वार 26 मार्च को प्रकाशित ग्लोबल इंपैक्ट स्टडी मॉडल और डेटा सेट के मुताबिक बनाया गया है। आईआरसी के मुताबिक, अगर देशों ने जल्द कदम ना उठाए तो आने वाले कुछ हफ्तों में संक्रमण के मरीजों की संख्या 50 करोड़ तक पहुंच सकती है। वहीं, 15-32 लाख लोगों की मौत हो सकती है। 

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी गरीब देशों में कोरोना वायरस का प्रभाव इसलिए पता नहीं चला है क्योंकि यहां टेस्ट काफी कम हो रहे हैं। बड़े देशों में टेस्ट ज्यादा हो रहे हैं, इसलिए संक्रमण के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं।