इसरो के अधिकारी ने दावा किया है कि चंद्रयान 3 के विक्रम लैंडर ने जिस तरह से चंद्रमा की सतह पर उछल-कूद की, वह हमारे प्लान का हिस्सा नहीं था।
चंद्रयान-3 और फ्यूचर मिशन को लेकर Asianet News Network के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राजेश कालरा ने ISRO चेयरमैन एस सोमनाथ से इसरो सेंटर में विस्तार से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि चांद से धरती तक 1 फोटो आने में आखिर कितना समय लगता है।
इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा- हम कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। लांचिंग सिस्टम, कम्युनिकेशन इंस्ट्रूमेंट्स की डिमांड ज्यादा है। कुछ साइंस मिशन पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा हम कुछ इससे भी बड़े टारगेट लेकर चल रहे हैं।
इसरो चीफ एस सोमनाथ के मुताबिक, जहां तक मिशन की लागत कम करने का सवाल है तो हमने अपने प्रोटोटाइपिंग को मिनिमाइज किया। इसके अलावा ज्यादातर डिजाइन आउटसोर्स नहीं किए बल्कि यहीं पर हमारे लोगों ने ही तैयार किए।
चंद्रयान-3 और फ्यूचर मिशन को लेकर Asianet News Network के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राजेश कालरा ने ISRO चेयरमैन एस सोमनाथ से इसरो सेंटर में विस्तार से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा सुनाया।
भारत के चंद्रयान मिशन की सफलता के बाद कई प्राइवेट कंपनियों ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए रॉकेट बनाने में रुचि दिखाई है। 23 निजी कंपनियां इसरो के लिए स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) बनाने को तैयार हैं।
ऐपल ने आईफोन प्रो को ही परफॉर्मेंस और कैमरा अपग्रेड के साथ पेश किया है। इसे खास कनेक्टिविटी फीचर से लैस किया गया है। इसमें डियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी इसरो की खास और देसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है।
भारत अपने पहले मानवीय पनडुब्बी मिशन पर काम कर रहा है। यह अभियान भारत के लिए काफी जरूरी है। समुद्रयान मिशन के जरिए महासागरों की गहराइयों में निकल, कोबाल्ट, मैगनीज जैसे खनिज की खोज में भी मदद मिलेगी।
इसरो के सोलर मिशन आदित्य एल1 (ISRO Solar Mission Aditya L1) ने पृथ्वी की दूसरी कक्षा में सफलतापूर्वक बदलाव पूरा कर लिया है और वह लैंग्रेज प्वाइंट की तरफ बढ़ चला है।
चांद और सूरज मिशन के बाद इसरो का अभियान और भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। आगामी दिनों में कई और ग्रहों पर फतह की तैयारी स्पेस एजेंसी ने कर रखी है। इससे अंतरिक्ष में भारत की अलग ही साख बन जाएगी।