उज्जैन. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला (अक्षय) नवमी कहते हैं। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। इस बार ये पर्व 23 नवंबर, सोमवार को है। यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भारतीय संस्कृति का पर्व है। जानिए इस पर्व का धार्मिक महत्व और वैज्ञानिक पक्ष…

आंवला नवमी का महत्व...
1. शास्त्रों के अनुसार, आंवला नवमी पर किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है। इस दिन जो भी शुभ कार्य जैसे दान, पूजा, भक्ति, सेवा किया जाता है उनका पुण्य कई-कई जन्म तक प्राप्त होता है।
2. इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे भोजन बनाकर ब्राह्मणों को करवाना चाहिए, इसके बाद स्वयं भोजन करना चाहिए। भोजन के समय पूर्व दिशा की ओर मुंह रखें।
3. शास्त्रों में बताया गया है कि भोजन के समय थाली में आंवले का पत्ता गिरे तो यह बहुत ही शुभ होता है। थाली में आंवले का पत्ता गिरने से यह माना जाता है कि आने वाले साल में व्यक्ति की सेहत अच्छी रहेगी।

ये है आंवले का औषधीय महत्व
- हमारे धर्म में हर उस वृक्ष को जिसमें बहुत अधिक औषधीय गुण हों, उनकी किसी विशेष तिथि पर पूजे जाने की परंपरा बनाई गई है।
- आंवला नवमी की परंपरा भी इसी का हिस्सा है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, आंवला प्रकृति का दिया हुआ ऐसा तोहफा है, जिससे कई सारी बीमारियों का नाश हो सकता है।
- आंवला में आयरन और विटामिन सी भरपूर होता है। आंवले का जूस रोजाना पीने से पाचन शक्ति दुरुस्त रहती है। त्वचा में चमक आती है, त्वचा के रोगों में लाभ मिलता है। आंवला खाने से बालों की चमक बढ़ती है।
- हम आंवले के महत्व को समझें व उसका संरक्षण करें। इसी भावना के साथ हमारे बुजुर्गों ने आंवला नवमी का त्योहार मनाने की परंपरा बनाई।

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