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Amla navami 2022: आंवला को क्यों मानते हैं पूजनीय वृक्ष? जानें इसका धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व

Amla navami 2022: हिंदू धर्म में पेड़-पौधों को भी भगवान का स्वरूप मानकर पूजा करने की परंपरा है। आंवला भी पूजनीय वृक्ष है। आंवला नवमी पर इस वृक्ष की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस बार आंवला नवमी 2 नवंबर, बुधवार को है।
 

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First Published Oct 31, 2022, 10:33 AM IST

उज्जैन. धर्म ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी (Amla navami 2022) का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये तिथि 2 नवंबर, बुधवार को है। इसे अक्षय नवमी भी कहते हैं। इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा विशेष रूप से की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। इस दिन पानी में आंवला का रस मिलाकर स्नान करने का महत्व भी धर्म ग्रंथों में बताया गया है। आगे जानिए आंवले का धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व…

भगवान विष्णु का स्वरूप है आंवला (religious importance of amla)
- धर्म ग्रंथों में आंवला वृक्ष का विशेष महत्व बताया गया है। पद्मपुराण के अनुसार, आंवला साक्षात विष्णु का ही स्वरूप है। 
- आंवला वृक्ष को प्रणाम करने से गोदान (गाय का दान) के बराबर फल मिलता है। इसे छूने से दोगुना और इसका फल खाने से तीन गुना फल मिलता है।
- आंवला वृक्ष के मूल में भगवान विष्णु, ऊपर ब्रह्मा, स्कंद में रुद्र, शाखाओं में मुनिगण, पत्तों में वसु, फूलों में मरुद्गण और फलों में प्रजापति का वास होता है। 

आंवला खाने से दूर होती हैं बीमारियां (ayurvedic importance of amla)
- आयुर्वेद में भी आंवले का विशेष महत्व बताया गया है। शीत ऋतु में आंवला विशेष रूप से खाना चाहिए, इससे त्वचा संबंधी रोग नहीं होते।
- आंवले का रस, चूर्ण और आंवले का मुरब्बा ये सभी हमारे स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाते हैं। आंवले का रस पीने से विटामिन सी की कमी पूरी होती है।
- आंवले का रस पानी में मिलाकर स्नान से त्वचा संबंधी कई रोगों में लाभ मिलता है। आंवले के रस के सेवन से त्वचा की चमक भी बढ़ती है। 
- आंवला शरीर में बढ़े पित्त को नियंत्रित करता है। लंबे समय तक आंवला खाने से कई तरह की बीमारियां खत्म होने लगती है। 
- एसिडिटी और इनडाइजेशन से बचने के लिए ऋषियों ने इस पर्व पर आंवला खाने की परंपरा बनाई है। 


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