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15 जून को मिथुन संक्रांति पर है स्नान, दान का खास महत्व, जानिए कब तक रहेगा पुण्यकाल

हिंदू कैलेंडर में सौर वर्ष के अनुसार सूर्य का राशि परिवर्तन संक्रांति कहलाता है। पुराणों में इस दिन को पर्व कहा गया है।

Bathing on Mithun Sankranti on June 15 and doing charity has special importance KPI
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Ujjain, First Published Jun 15, 2020, 10:19 AM IST
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उज्जैन. सूर्य जिस भी राशि में प्रवेश करता है उसे उसी राशि की संक्रांति कहा जाता है। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र बताते हैं कि सूर्य एक साल में 12 राशियां बदलता है इसलिए सालभर में ये पर्व 12 बार मनाया जाता है। जिसमें सूर्य अलग-अलग राशि और नक्षत्रों में रहता है। संक्रांति पर्व पर दान-दक्षिणा और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है।

14 जून की रात राशि बदलेगा सूर्य
हिंदू कैलेंडर के अनुसार 14 जून की रात 12 बजे के बाद सूर्य वृष से मिथुन राशि में चला जाएगा। इसलिए इसे मिथुन संक्रांति कहा जाएगा। मिथुन संक्रांति से तीसरे सौर महीने की शुरुआत होती है। इस सौर महीने में ही वर्षा ऋतु भी आ जाती है। मिथुन संक्रांति आषाढ़ महीने में आती है। इस महीने के देवता सूर्य हैं। इसलिए ये संक्रांति पर्व और भी खास हो जाता है।

सूर्य पूजा और दान का महत्व
स्कंद और सूर्य पुराण में आषाढ़ महीने में सूर्य पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस हिंदू महीने में मिथुन संक्रांति पर सुबह जल्दी उठकर भगवान सूर्य को जल चढ़ाया जाता है। इसके साथ ही निरोगी रहने के लिए विशेष पूजा भी की जाती है। सूर्य पूजा के समय लाल कपड़े पहनने चाहिए। पूजा सामग्री में लाल चंदन, लाल फूल और तांबे के बर्तन का उपयोग करना चाहिए। पूजा के बाद मिथुन संक्रांति पर दान का संकल्प लिया जाता है। इस दिन खासतौर से कपड़े, अनाज और जल का दान किया जाता है।

पूजा और दान के लिए पुण्य काल
14 जून की रात करीब 12 बजे के बाद सूर्य राशि बदलकर मिथुन में प्रवेश कर जाएगा। इसके बाद 15 जून को मिथुन राशि में ही सूर्योदय होगा। इस वजह से सूर्य पूजा और दान करने के लिए पुण्यकाल सुबह करीब 05.10 से 11:55 तक रहेगा। इस मुहूर्त में की गई पूजा और दान से बहुत पुण्य मिलता है। 

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