दुर्योधन के बारे में तो हम सभी जानते हैं कि वह धृतराष्ट्र का सबसे बड़ा पुत्र था और युद्ध का मुख्य कारण भी वही था।

उज्जैन. बहुत कम लोग ये बात जानते हैं कि एक समय ऐसा भी आया था जब दुर्योधन आत्महत्या करना चाहता था, इसके लिए उसने अन्न-जल भी छोड़ दिया था, लेकिन बाद में राक्षसों के कहने पर उसने ये विचार छोड़ दिया। ये पूरी घटना कब और कैसे हुई, जानिए...

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क्यों आत्महत्या करना चाहता था दुर्योधन?

  • वनवास के दौरान जब पांडव द्वैतवन में रह रहे थे। तब दुर्योधन पांडवों को अपना वैभव दिखाने के उद्देश्य से अपने दल-बल के साथ वहां पहुंच गया। दुर्योधन ने अपने सेवकों को सरोवर के निकट एक क्रीडा भवन तैयार करने को कहा, लेकिन गंधर्वों ने उन्हें रोक दिया।
  • दुर्योधन के कहने पर सैनिक सरोवर की सीमा में घुस गए और गंधर्वों को मारने लगे। गंधर्वों के स्वामी चित्रसेन ने मायास्त्र चलाकर कौरव सेना को भ्रम में डाल दिया। चित्रसेन ने दुर्योधन, दु:शासन आदि को बंदी बना लिया।
  • कौरव सैनिकों ने ये बात जाकर पांडवों को बताई। पांडवों ने पराक्रम दिखाकर दुर्योधन को गंधर्वों की कैद से छुड़ा लिया। जब दुर्योधन को ये पता चला कि पांडवों ने उसकी रक्षा की है तो दुखी होकर उसने आत्महत्या करने का विचार किया। कर्ण, दु:शासन और शकुनि ने उसे बहुत समझाया, लेकिन दुर्योधन नहीं माना।
  • दुर्योधन ने साधुओं के वस्त्र पहन लिए और अन्न-जल त्याग कर वन में ही रहने लगा। देवताओं से पराजित पातालवासी दैत्यों को जब यह पता चला तो उन्होंने सोचा कि दुर्योधन का अंत हो गया तो हमारा पक्ष कमजोर हो जाएगा। यह सोचकर उन्होंने एक कृत्या (राक्षसी) को दुर्योधन के पास भेजा।
  • दुर्योधन के शरीर में प्रवेश कर वह राक्षसी उसे पाताल में ले आई। दैत्यों ने दुर्योधन को समझाया कि तुम्हारी सहायता के लिए अनेक दानव पृथ्वी पर आ चुके हैं। युद्ध में वे तुम्हारा साथ देंगे और तुम्हारी ही जीत होगी। जब दुर्योधन पुन: धरती पर आया तो उसे ये घटना एक सपने की तरह लगी।
  • दूसरे दिन कर्ण ने दुर्योधन के सामने प्रतिज्ञा की कि अज्ञातवास समाप्त होते ही वह पांडवों का विनाश कर देगा। इस प्रकार कर्ण के कहने पर और दैत्यों की बात याद कर दुर्योधन ने आत्महत्या करने का विचार छोड़ दिया।