सभी मंदिरों में देवी-देवताओं की पूजा के बाद भक्तों के प्रसाद के रूप में चरणामृत और पंचामृत दिया जाता है। ये दोनों अलग-अलग होते हैं और इन्हें बनाने की विधि भी अलग है।

उज्जैन. आयुर्वेद के अनुसार चरणामृत और पंचामृत सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। चरणामृत जल से बनता है और पंचामृत दूध, दही, घी आदि चीजें मिलाकर बनाकर जाता है। जानिए दोनों से जुड़ी खास बातें...

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चरणामृत कैसे बनता है?
चरणामृत का शाब्दिक अर्थ है भगवान के चरणों का अमृत। पूजा करते समय भगवान के चरणों में तांबे के बर्तन में शुद्ध जल अर्पित किया जाता है। इस जल में तुलसी के पत्ते भी मिलाए जाते हैं। इस प्रकार चरणामृत बनता है।

चरणामृत के फायदे
तांबे के बर्तन में रखे तुलसी मिश्रित जल में औषधीय आ जाते हैं, जिसका सेवन करने से हमें स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। तांबे का जल पेट और लिवर से संबंधित कई बीमारियों की रोकथाम करता है और तुलसी के गुण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

पंचामृत कैसे बनता है?
पंचामृत का अर्थ है पांच प्रकार के अमृत। इसे दूध, दही, घी, शहद, मिश्री मिलाकर बनाया जाता है। पंचामृत से भगवान का अभिषेक भी किया जाता है, मूर्ति को स्नान कराया जाता है।

पंचामृत के फायदे
पंचामृत के पांचों तत्व सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इन पांच चीजों से बने मिश्रण में कैल्शियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा विटामिन जैसे तत्व होते हैं। ये सभी तत्व हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। पंचामृत से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से बढ़ती है। इसके नियमित सेवन से त्वचा की चमक बढ़ती है और कमजोरी दूर होती है।