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Chhath Puja 2022: 30 अक्टूबर को डूबते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य, जानें प्रमुख शहरों में सूर्यास्त का समय

Chhath Puja 2022 Sandhya Arghya Shubh Muhurat: छठ पूजा के तीसरे दिन डुबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर उसकी की जती है। ये छठ व्रत का सबसे खास दिन होता है। इस दिन छठ पर्व की रौनक देखते ही बनती है।
 

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First Published Oct 30, 2022, 9:43 AM IST

उज्जैन. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि (Chhath Puja 2022) को सूर्य को संध्याकालीन अर्घ्य दिया जाता है। ये छठ पर्व का तीसरा दिन होता है। इस बार ये तिथि 30 अक्टूबर, रविवार को है। इसके अगले दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ व्रत का समापन किया जाता है। छठ पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। छठ का त्योहार मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी माता की पूजा और उपासना का त्योहार है। मान्यता है कि इस व्रत के शुभ प्रभाव से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आगे जानिए 30 अक्टूबर, रविवार को किस शहर में किस समय सूर्यास्त होगा और इसके बाद ही सूर्य को संध्याकालीन अर्घ्य दिया जाएगा।

आपके शहर में कब होगा सूर्यास्त
शहर             सूर्यास्त का समय
कोलकाता      शाम 05:00 बजे
पटना             शाम 05: 10 मिनट पर
रांची              शाम  05:12 मिनट पर
वाराणसी        शाम 05:19 मिनट पर
लखनऊ        शाम 05:25 मिनट पर
रायपुर          शाम 05:29 मिनट पर
देहरादून       शाम 05: 32 मिनट पर
नोएडा          शाम 05: 37 मिनट पर
दिल्ली          शाम 05:38 मिनट पर
चेन्नई            शाम 05 :43 मिनट पर
भोपाल         शाम 05:43 मिनट पर
जयपुर          शाम 05:46 मिनट पर
मुंबई            शाम 06:06 मिनट पर


ये हैं सूर्यदेव के 12 नाम
धर्म ग्रंथों के अनुसार, सूर्य पंचदेवों में से एक हैं और रोज सुबह सूर्य को अर्घ्य देने से धर्म लाभ के साथ ही सेहत को भी लाभ मिलते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार रोज सुबह सूर्य को अर्घ्य देते समय सूर्यदेव को 12 नामों का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। जानिए सूर्यदेव के 12 नाम और उनका अर्थ...
रश्मिमते- हजारों किरणों का पुंज।
दिवाकर- दिवाकर यानी जिसके आते ही अंधेरा खत्म हो जाता है।
आदिदेव- सूर्य की उत्पत्ति के बारे में कोई नहीं जानता, इसलिए इन्हें आदिदेव कहा जाता है।
प्रभाकर - सुबह को प्रभा भी कहते हैं। प्रभाकर यानी सुबह करने वाला।
सविता- इसक का अर्थ है उत्पन्न करने वाला।
भुवनेश्वर- भुवनेश्वर यानी धरती पर राज करने वाला। 
सूर्य - सूर्यदेव लगातार भ्रमण करते रहते हैं। सूर्य का अर्थ ही है भ्रमण करने वाला।
भानु- सूर्य के तेज को भानु कहते हैं। 
रवि - ज्योतिष में रविवार का स्वामी सूर्य है। इस वजह सूर्य का एक नाम रवि है।
सप्तरथी- सूर्य सात घोड़ों के रथ पर सवार रहते हैं। इसलिए इन्हें सप्तरथी कहा जाता है।
आदित्य- सूर्य अदिति के पुत्र हैं। इसलिए इनका एक नाम आदित्य भी है। 
दिनकर- इस नाम का अर्थ है जो दिन करने वाला है। 


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