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3 अप्रैल को इस आसान विधि से करें जवारे विसर्जन, ये हैं शुभ मुहूर्त

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि वासंतीय नवरात्रि का अंतिम दिन होता है।

Do Jaware immersion with this simple method on April 3, these are auspicious times KPI
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Ujjain, First Published Apr 2, 2020, 10:13 AM IST
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उज्जैन. इस तिथि के अगले दिन यानी दशमी तिथि (3 अप्रैल, शुक्रवार) को नवरात्रि के पहले दिन स्थापित किए गए जवारे विधि-विधान पूर्वक विसर्जन किए जाते हैं। विसर्जन के पूर्व माता भगवती तथा जवारों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। ये पूजन विधि इस प्रकार है-

पूजा विधि
-जवारे विसर्जन के पहले भगवती दुर्गा का गंध, चावल, फूल, आदि से पूजा करें तथा इस मंत्र से देवी की आराधना करें-
रूपं देहि यशो देहि भाग्यं भगवति देहि मे।
पुत्रान् देहि धनं देहि सर्वान् कामांश्च देहि मे।।
महिषघ्नि महामाये चामुण्डे मुण्डमालिनी।
आयुरारोग्यमैश्वर्यं देहि देवि नमोस्तु ते।।

-इस प्रकार प्रार्थना करने के बाद हाथ में चावल व फूल लेकर जवारे का इस मंत्र के साथ विसर्जन करना चाहिए-
गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि।
पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च।।

इस प्रकार विधिवत पूजा करने के बाद जवारे का विसर्जन कर देना चाहिए, लेकिन जवारों को फेंकना नही चाहिए। उसको परिवार में बांटकर सेवन करना चाहिए। इससे नौ दिनों तक जवारों में व्याप्त शक्ति हमारे भीतर प्रवेश करती है। जिस पात्र में जवारे बोए गए हों, उसे तथा इन नौ दिनों में उपयोग की गई पूजन सामग्री का श्रृद्धापूर्वक विसर्जन कर दें।

ये हैं शुभ मुहूर्त

  • सुबह 07:50 से 10:40  तक
  • दोपहर 12:30 से 01:50 तक
  • शाम 05:00 से 6:30 तक
     
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