Asianet News Hindi

सावन मान्यता: इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से होती है सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति

प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में मल्लिकार्जुन का स्थान दूसरा है। शिवपुराण के अनुसार, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग शिव तथा पार्वती दोनों का संयुक्त स्वरूप है।

It's an accreditation if this jyotirling is visited in month of sawan then all the happiness can be achieved
Author
Ujjain, First Published Jul 29, 2019, 3:38 PM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

उज्जैन. प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में मल्लिकार्जुन का स्थान दूसरा है। यह ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नामक पर्वत पर स्थित है। शिवपुराण के अनुसार, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग शिव तथा पार्वती दोनों का संयुक्त स्वरूप है। मल्लिका का अर्थ पार्वती और अर्जुन शब्द भगवान शिव के लिए प्रयोग किया गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो मनुष्य इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है तथा उसे सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।

ऐसे स्थापित हुआ ये ज्योतिर्लिंग
शिवपुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती और भगवान शिव के मन में अपने दोनों पुत्रों कार्तिकेय व श्रीगणेश के विवाह का विचार आया। यह जान कर कार्तिकेय व श्रीगणेश पहले विवाह करने की जिद करने लगे। तब भगवान शिव व माता पार्वती ने उनके सामने शर्त रखी कि तुम दोनों में से जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा कर लौटेगा, उसी का विवाह पहले होगा। यह सुनते ही कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा करने चल दिए, लेकिन श्रीगणेश ने वहीं पर शिव-पार्वती की परिक्रमा कर यह सिद्ध कर दिया कि माता-पिता में ही संपूर्ण सृष्टि विराजमान है। इस प्रकार श्रीगणेश अपनी बुद्धि से वह शर्त जीत गए और उनका विवाह पहले हो गया। जब यह बात कार्तिकेय को पता चली तो वे बहुत क्रोधित हुए और शिव-पार्वती के रोकने पर भी क्रौंच पर्वत पर चले गए। 
शिव व पार्वती के अनुरोध करने पर भी कार्तिकेय नहीं लौटे तथा वहां से 12 कोस दूर चले गए। कार्तिकेय के यूं रूठ कर चले जाने से माता पार्वती को बहुत दु:ख हुआ। तब अपनी प्रिय पत्नी को सुख देने के उद्देश्य से भगवान शिव पार्वती को साथ लेकर अपने एक अंश से क्रौंच पर्वत पर गए और मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रतिष्ठित हो गए। इस ज्योतिर्लिंग में शिव व पार्वती दोनों की ही ज्योति विद्यमान है। शिवपुराण के अनुसार, पुत्र स्नेह के कारण शिव-पार्वती प्रत्येक पर्व पर कार्तिकेय को देखने के लिए जाते हैं। अमावस्या के दिन स्वयं भगवान शिव वहां जाते हैं और पूर्णिमा के दिन माता पार्वती जाती हैं।

कैसे पहुंचें ? 

  • सड़क के जरिए श्रीसैलम पूरी तरह से जुड़ा हुआ है। विजयवाड़ा, तिरुपति, अनंतपुर, हैदराबाद और महबूबनगर से नियमित रूप से श्रीसैलम के लिए सरकारी और निजी बसें चलाई जाती हैं। 
  • श्रीसैलम से 137 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैदराबाद का राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है। यहां से आप बस या फिर टैक्सी के जरिए मल्लिकार्जुन पहुंच सकते हैं।
  • यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन मर्कापुर रोड है जो श्रीसैलम से 62 किलोमीटर की दूरी पर है।
Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios