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Janmashtami: उडूपी के इस मंदिर में खिड़की से होते हैं श्रीकृष्ण प्रतिमा के दर्शन, बहुत अलग है यहां की परंपरा

30 अगस्त, सोमवार को जन्माष्टमी  (Janmashtami 2021) है। इस मौके पर देश के सभी श्रीकृष्ण मंदिरों की भक्तों की भीड़ उमड़ती है। भारत में भगवान श्रीकृष्ण के अनेक प्रसिद्ध मंदिर है, उन्हीं में से एक है कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी (Udupi) का कृष्ण मंदिर। 

Janmashtami In this Udupi temple, Shri Krishna darshan is done through a window
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Ujjain, First Published Aug 26, 2021, 2:46 PM IST
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उज्जैन. कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी (Udupi) का कृष्ण मंदिर अपनी अलग परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। एक बात जो इस मंदिर को खास बनाती है, वो है इस मंदिर की पूजा पद्धति। इस मंदिर में दर्शन की प्रक्रिया एक चांदी की परत वाली खिड़की से होती है जिसमें नौ छेद होते हैं। यह मंदिर 1000 साल पुराना माना जाता है। इसका निर्माण श्री मध्याचार्य ने किया था जो मध्यकालीन युग के प्रसिद्ध वैष्णव संत थे। ये दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। इस जगह को दक्षिणी भारत का मथुरा कहा जाता है

बदलती रहती है संचालन की व्यवस्था
हर दो साल में प्रशासन और मंदिर के प्रसाद को आठ मठों के बीच चक्रीय रूप से प्रबंधित किया जाता है। एक मठ से दूसरे मठ में पूजा का कार्य सौंपने की रस्म को पयारा महोत्सव के रूप में जाना जाता है। हर दो साल में होने वाले पयारा त्योहार को मंदिर प्रबंधन को अगले मठ को सौंप दिया जाता है। उडुपी मठ में जन्माष्टमी, राम नवमी, नरसिंह जयंती, वसंतोत्सव, अनंत चतुर्दशी और मेघ संक्रांति के त्योहार भव्य रूप से मनाए जाते हैं।

ऐसे होते हैं दर्शन
इस मंदिर में देव प्रतिमा के दर्शन 9 छेदों वाली वाली खिड़की, जिसे कनकदासा कहते हैं, के माध्यम से होते हैं। किसी को भी भगवान कृष्ण की मूर्ति के पास जाने की अनुमति नहीं है। इसलिए दर्शन के लिए, उपर्युक्त 9-पवित्र खिड़की का उपयोग किया जाता है। हॉल के एक तरफ अपने ध्यान मुद्रा में भगवान हनुमान को बैठाया गया है। मंदिर में एक पारंपरिक दीपस्तंभ है जहां पवित्र तेल से ज्योत या दीपक जलता रहता है। पूर्वी द्वार आमतौर पर बंद रहता है और केवल विजयादशमी को खुलता है। साथ ही मंदिर के दक्षिण द्वार पर मध्यापुष्कर्णी तालाब है, जहां कृष्ण के भक्त स्नान कर खुद को धन्य मानते हैं।

कैसे पहुंचें?
- उडुपी रेलवे स्टेशन कृष्ण मंदिर से 3 किमी की दूरी पर है। यहाँ से बसें और टैक्सियाँ भी मंदिर के लिए उपलब्ध हैं। उडुपी मंदिर के करीब मंगलौर रेलवे स्टेशन हैं। आप चाहें तो यहां से कैब या टैक्सी भी मंदिर के लिए मिल जाएंगी।
- मंगलोर उडुपी का निकटतम हवाई अड्डा है। कोई बैंगलोर से मैंगलोर के लिए सीधी उड़ान पकड़ सकता है, जहां से उडुपी के लिए टैक्सी किराए पर ली जा सकती है।
- KSRTC, साथ ही निजी बसें, मंगलौर और उडुपी के बीच अक्सर चलती हैं। यहां पहुंचने के लिए आप निजी टैक्सी या टैक्सी किराए पर ले सकते हैं।

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