Asianet News HindiAsianet News Hindi

परंपरा: हर पूजा में होता है नारियल का उपयोग, लेकिन इसे महिलाएं नहीं फोड़ सकतीं, जानिए क्यों?

हिंदू धर्म में नारियल का विशेष महत्व है। इसे श्रीफल भी कहते हैं। श्री का अर्थ है लक्ष्मी अर्थात देवी लक्ष्मी का प्रिय फल।

Know the importance of using coconut on religious occasions KPI
Author
Ujjain, First Published Aug 16, 2020, 2:34 PM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

उज्जैन. किसी भी धार्मिक पूजा के दौरान भोग के रूप में नारियल अवश्य चढ़ाया जाता है। इसके अलाना मांगलिक कामों में नारियल का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, पूजा के अंत में नारियल फोड़ा जाता है और प्रसाद स्वरूप सभी लोगों को बांटा जाता है, लेकिन हमारे धर्म में महिलाओं द्वारा नारियल फोड़ना प्रतिबंधित है। जानिए क्या है इसका कारण…

- देवी-देवताओं को श्रीफल चढ़ाने के बाद पुरुष ही इसे फोड़ते हैं। शनि की शांति हेतु नारियल के जल से शिवलिंग पर रुद्रभिषेक करने का शास्त्रीय विधान भी है।
- भारतीय वैदिक परंपरा अनुसार श्रीफल शुभ, समृद्धि, सम्मान, उन्नति और सौभाग्य का सूचक माना जाता है।
- किसी को सम्मान देने के लिए शॉल के साथ श्रीफल भी भेंट किया जाता है। भारतीय सामाजिक रीति-रिवाजों में भी शुभ शगुन के तौर पर श्रीफल भेंट करने की परंपरा युगों से चली आ रही है।
- विवाह की सुनिश्चित करने हेतु अर्थात तिलक के समय श्रीफल भेंट किया जाता है। बिदाई के समय नारियल व धनराशि भेंट की जाती है।
- यहां तक की अंतिम संस्कार के समय भी चिता के साथ नारियल जलाए जाते हैं। वैदिक अनुष्ठानों में कर्मकांड में सूखे नारियल को वेदी में होम किया जाता है।
- श्रीफल बीज रूप है, इसलिए इसे उत्पादन अर्थात प्रजनन का कारक माना जाता है। श्रीफल को प्रजनन क्षमता से जोड़ा गया है।
-  स्त्रियां बीज रूप से ही शिशु को जन्म देती हैं और इसलिए नारी के लिए बीज रूपी नारियल को फोड़ना अशुभ माना गया है।
 

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios