हर व्यक्ति के मन में  पुरातन समय से जुड़ी बातें जानने की इच्छा होती हैं। जैसे प्राचीनकाल में लोग किस तरह से जीवन-यापन करते हैं। पुरातन समय के त्योहार, परंपराएं आदि। साथ ही साथ उस समय के अस्त्र-शस्त्र के बारे में भी हर कोई जानना चाहता है।

उज्जैन. रामायण (Ramayana) और महाभारत (Mahabharata) में ऐसे अनेक अस्त्र-शस्त्रों के बारे में बताया गया है जो महाविनाशक थे या यूं कहें कि पुराने समय के परमाणु बम थे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। ऐसा ही एक अस्त्र था ब्रह्मास्त्र, जिसे सबसे खतरनाक माना जाता था। रामायण में कई बार इस अस्त्र का उपयोग किया गया। Asianetnews Hindi ब्रह्मास्त्र (Brahmastra Series 2022) पर एक सीरीज चला रहा है, कहानी ब्रह्मास्त्र की…जिसमें हम आपको ब्रह्मास्त्र से जुड़ी खास बातें, प्रसंग व अन्य रोचक तथ्यों के बारे में बताएंगे। आगे जानिए क्या हुआ जब रावण के पुत्र मेघनाद ने हनुमानजी पर चलाया ब्रह्मास्त्र… 

कब हुआ मेघनाद (Meghnad) और हनुमानजी (Lord Hanuman) का सामना?
- जब हनुमानजी देवी सीता की खोज में लंका में पहुंचें तो उन्होंने देवी सीता को काफी ढूंढा, लेकिन सफलता नहीं मिली तो वे निराश हो गए। तब विभीषण ने उन्हें देवी सीता के बारे में बताया। तब हनुमानजी अशोक वाटिका पहुंचें और उन्होंने भगवान श्रीराम का संदेश देवी सीता को सुनाया। 
- इसके बाद जब हनुमानजी को भूख लगी तो वे अशोका वाटिका के फूल तोड़कर खाने लगे। इतने विशाल वानर को देख पहरेदारों ने इसकी सूचना रावण को दी। रावण ने अपने पुत्र अक्षयकुमार को हनुमानजी को बंदी बनाने के लिए भेजा, लेकिन हनुमानजी ने उसका वध कर दिया। 
- तब रावण का सबसे पराक्रमी पुत्र मेघनाद हनुमानजी को पकड़ने आया। उसने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। वरदान के कारण ब्रह्मास्त्र हनुमानजी का अहित नहीं कर सकता था, लेकिन ब्रह्मा का अस्त्र होने के कारण हनुमानजी स्वयं उसके बंधनों में बंध गए।

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हनुमानजी को किसने दिया था ब्रह्मास्त्र से बचने का वरदान?
रामायण के अनुसार, एक बार इंद्र ने किसी बात पर नाराज होकर हनुमानजी पर वज्र का प्रहार कर दिया, जिससे हनुमानजी बेहोश हो गए। क्रोधित होकर पवनदेव ने संसार की प्राण वायु रोक दी जिससे पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया। तब परमपिता ब्रह्मा हनुमान को होश में लाए। उस समय सभी देवताओं ने हनुमानजी को वरदान दिए। इन वरदानों से ही हनुमानजी परम शक्तिशाली बन गए। उसी समय ब्रह्मदेव ने उन्हें ये वरदान दिया था कि जगतपिता ब्रह्मा जी ने हनुमान को दीर्घायु व महात्मा होने के वरदान देते हुए कहा कि यह बालक सभी प्रकार के ब्रह्दण्डों से अवध्य होगा। किसी भी युद्ध में इसे जीत पाना असंभव होगा। यह इच्छा अनुसार रूप धारण कर सकेगा और यह जहां चाहेगा वहां जा सकेगा।


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