उज्जैन. माघी पूर्णिमा पर नदी में स्नान करने की और दान-पुण्य करने की परंपरा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, धर्म ग्रंथों में ऐसा लिखा है कि माघी पूर्णिमा पर सभी देवी-देवता प्रयागराज के संगम पर स्नान करने आते हैं। कल्पवास करने वाले साधु-संत इस पूर्णिमा के बाद अपने-अपने स्थान पर लौटने लगते हैं। इस दिन तिल और कंबल का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।

पूर्णिमा पर कर सकते हैं ये काम भी
1.
पूर्णिमा भगवान सत्यनारायण की कथा भी करनी चाहिए। इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु, लक्ष्मी, बालकृष्ण की पूजा करें। पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, ऊँ महालक्ष्म्यै नम:, कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।
2. इस तिथि पर पितरों के लिए धूप ध्यान जरूर करें। किसी नदी में तर्पण करें। जरूरतमंद लोगों को खाना और धन दान करें। नए वस्त्र, कंबल, गुड़, फल आदि चीजों का दान भी करें।
3. किसी मंदिर में शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल और चांदी के लोटे से दूध चढ़ाएं। बिल्व पत्र, धतूरा, हार-फूल सहित अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। धूप-दीप जलाएं।
4. हनुमानजी के सामने धूप-दीप जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर आपके पास पर्याप्त समय है तो सुंदरकांड का पाठ करें।
5. गाय का हरा चारा खिलाएं, मछलियों के लिए आटे की गोलियां बनाकर नदी या तालाब में डालें।